सफेद घोड़े को सजाकर धजाकर बाजे गाजे के साथ आधा दर्जन मोहल्लों में घूमते हुए दुलदुल को बड़े कब्रिस्तान ले जाकर दफना दिया गया।
रास्ते में जगह जगह जुलूस को रोककर अकीदतमंदों ने दुलदुल घोड़े को दूध और जलेबी खिलाई। रात लगभग आठ बजे मुटुन खलीफा वाले कब्रिस्तान में आकर खत्म हुआ।
इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
दोपहर लगभग दो बजे नूरखांपुर एक मिनारा मसजिद से दुलदुल का जुलूस निकला। जुलूस में लोगों की भीड़ थी। जुलूस को देखने के लिए छतों पर महिलाओं और बच्चों की लाइन लगी थी।
इसके लिए सुबह से ही तैयारियां की गई थीं। घोड़े को नहला धुलाकर फूल मालाओं से लादकर आकर्षक ढंग से सजा धजा कर बाजे गाजे संग रवाना किया गया। मोहल्ला आलमपुर, जल्लापुर, नईबस्ती, फरीदन पोखरा आदि होते हुए रात 8 बजे कब्रिस्तान में आकर समाप्त हुआ। जहां पहले से ही मौजूद सैकड़ों लोगों ने मिलकर दफन किया। रास्ते में में मौजूद अकीदतमंदों ने दुलदुल घोड़े को रोक कर दूध जलेबी खिलाई। जुलूस के साथ वकील खलीफा, शमसाद टिल्लू, साबिर अंसारी, मोहसिन कमाल, एबरार उर्फ ठल्लू, हाफिज असहाब, आफताबू, जहांगीर आलम, मुख्तार मेंबर, मोदस्सिर, नसीम अहमद, अलाउद्दीन, नसरुद्दीन अंसारी सहित सैकड़ों लोग शामिल हुए।