कम समय में लखपति और करोड़पति बनने की ख्वाहिश युवाओं को साइबर क्राइम की ओर धकेल रही है। जिले में साइबर क्राइम का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। ऑनलाइन खरीदारी और एटीएम कार्ड की हेराफेरी कर भोले-भाले उपभोक्ताओं को चूना लगाया जा रहा है। ज्यादातर पढ़े-लिखे लोग इसमें सक्रिय हैं। अगर साइबर क्राइम के शिकार हो गए तो न्याय मिलना मुश्किल हो जाएगा।
भागदौड़ भरी जिंदगी और बढ़ती बेरोजगारी से साइबर क्राइम का ग्राफ दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। फर्जी तरीके से एटीएम से पैसा निकालने के साथ ही मोबाइल, फेसबुक, वाट्सएप के जरिए अश्लीलता से जुड़ी हरकतें भी तेजी से बढ़ रहीं हैं। साइबर अपराध पर लगाम कसने के लिए सरकार ने भले ही 2013 में साइबर सेल का गठन कर दिया है, लेकिन ढाक के पात वाली कहावत चरितार्थ हो रही है।
आए दिन लोग साइबर क्राइम के शिकार हो रहे हैं, लेकिन महकमे के रिकार्ड में अब तक मात्र सात मामले ही दर्ज किए गए हैं। विभाग का दावा है कि ज्यादातर मामलों का निस्तारण थाने स्तर से ही कर लिया जाता है, जबकि ऐसे मामलों की शिकायत ही थानों में दर्ज नहीं की जाती।
थानों में साइबर विशेषज्ञ न होने से ऐसे अपराध को रोक पाना मुश्किल हो यगा है। साइबर क्राइम का शिकार अगर कोई उपभोक्ता हुआ तो उसे आज तक न्याय नहीं मिल सका है।