परिषदीय स्कूलों के बच्चों के यूनिफॉर्म वितरण में लगभग 1.5 करोड़ के गड़बड़झाले की जांच के लिए चार सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से गठित जांच टीम में लेखाधिकारी, डीसी एमडीएम के अलावा दो खंड शिक्षा अधिकारी शामिल हैं। बीएसए ने 15 दिन में जांच रिपोर्ट मांगी है। उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन की रोक के बावजूद जिले के 80 फीसदी परिषदीय स्कूलों में यूनिफॉर्म वितरण का भुगतान फर्मों को करा दिया गया था।करीब सात महीने तक ठंडे बस्ते में पड़े रहने के बाद पूर्व डीएम प्रकाश बिंदु के आदेश के क्रम में बीएसए ने जांच के लिए चार सदस्यीय टीम गठित कर दी है।
प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को हर साल शासन से नि:शुल्क दो सेट यूनिफॉर्म मुहैया कराया जाता है। स्कूल के हेडमास्टर और फर्म के माध्यम से बच्चों को जुलाई से लेकर सितंबर तक ड्रेस वितरण होता है। गत चार साल से गुणवत्ता को लेकर विवादों में रहने वाला यूनिफॉर्म वित्तीय वर्ष 2015-16 में भी ठीक नहीं रहा। करीब एक लाख 60 हजार बच्चों को 200 रुपये प्रति ड्रेस की दर से करीब साढ़े सात करोड़ रुपये शासन से आवंटित किया गया था। 15 से 16 फर्मों के माध्यम से स्कूलों में यूनिफॉर्म का वितरण किया गया। तत्कालीन डीएम प्रकाश बिंदु ने जिले के कई स्कूलों का औचक निरीक्षण कर यूनिफॉर्म की जांच की। इस दौरान गुणवत्ता न मिलने पर उन्होंने फर्मों के 25 फीसदी भुगतान (लगभग 1.5 करोड़) पर रोक लगा दी। जून 2016 में डीएम ने जांच के बाद सीडीओ और बीएसए से सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया।
फाइल को दबा दिया गया। आरटीआई कार्यकर्ता आदर्श त्रिपाठी ने प्रकरण में जनसूचना अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। डीएम की रोक के बाद भी 25 फीसदी भुगतान फर्मों को कर दिया गया। बेसिक शिक्षा विभाग से लेकर प्रशासनिक अफसरों के कान खड़े हो गए। सबसे खास बात यह रही कि विभागीय स्तर से राज्य परियोजना कार्यालय को भी भ्रामक सूचनाएं दी गईं। बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रकाश नारायण श्रीवास्तव ने मामला संज्ञान में आने के बाद जांच के लिए टीम गठित कर दी।
इसमें वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक, डीसी एमडीएम, खंड शिक्षा अधिकारी ज्ञानपुर और औराई शामिल हैं। बीएसए ने 15 दिन के अंदर जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद धनराशि की रिवकरी होगी और मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा। बीएसए की इस कार्रवाई से तीन खंड शिक्षा अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।