मानसूनी बारिश अब कहीं खुशी को कहीं गम की स्थिति पैैदा करने लगी है। शनिवार को दोपहर में एक घंटे की बारिश से सड़कें लबालब हो गई। निचले इलाकों में निकासी की सुविधा न होने से जलजमाव हो गया। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के साथ चक्रवाती हवा चलने से खेतों में खड़ी कई बीघे धान की फसल गिर गई। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी है।
जून माह में करीब एक पखवारे विलंब से आया मानसून दो माह में अच्छी बारिश से काफी सहूलियत दी है।शनिवार को दोपहर बाद एक घंटे की झमाझम बारिश से सड़कों पर एक फीट तक पानी भर गया। ज्ञानपुर के पुरानी बाजार, बालीपुर, पुरानी देहाती मोहल्लों में जल निकासी की सुविधा न होने से पानी भर गया। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश के साथ तेज हवा चलने से फली लगी धान की फसलें गिर गई। अगैती फसलों को हवा चलने से काफी नुकसान हुआ।
दोपहर के समय बारिश होने से स्कूल से घर जाने वाले छात्र-छात्राओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बताते चलें कि करीब पांच साल बाद मानसून से ऐसी स्थिति बनी है कि ज्यादातर किसानों को बारिश के चलते पंपिगसेट का सहारा नहीं लेना पड़ा। कृषि विशेषज्ञ एके चौबे ने कहा कि बारिश धान समेत अन्य किसी फसल के लिए नुकसानदायक नहीं है। बारिश के साथ अगर हवा चलती है तो फली लगी धान की फसल गिरने की संभावना बढ़ जाती है। एक बार धान की फसल गिरने से उसकी पैदावार प्रभावित हो जाती है।