ऊंज थाने के अस्पताल में बिखरा सामान। संवाद
ज्ञानपुर। सावन माह में होने वाली दुर्घटनाओं में घायलों के उपचार की प्रशासनिक तैयारियां नाकाफी हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान हाईवे की बंद उत्तरी लेन तथा एक लेन पर बढ़े वाहनों के दबाव के बीच होने वाली दुर्घटनाओं में घायलों को किस तरह उपचार मिलेगा, इसे लेकर अब तक कोई रोडमैप तैयार नहीं है। हाईवे के तीन थानों में बने अस्पताल केवल भवन बनकर रह गए हैं। वहीं, औराई व गोपीगंज सीएचसी को छोड़ दें तो एक पीएचसी और ट्रॉमा सेंटर में उपचार रामभरोसे ही होगा। हमारी टीम की शुक्रवार को की गई पड़ताल में स्वास्थ्य केंद्रों पर व्यवस्थाएं नाकाफी मिलीं।
हाईवे के किनारे निजी और सरकारी मिलाकर करीब 20 अस्पताल हैं। इनमें चार सरकारी और 13 निजी हैं। वाराणसी-प्रयागराज हाईवे के 86 किमी दायरे में से 42 किमी हिस्सा जिले की सीमा में है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक तैयारियां नाकाफी हैं। केंद्र प्रभारियों को माइक्रोप्लान जारी नहीं हुआ है।
थानों के अस्पतालों की पड़ताल के दौरान औराई व गोपीगंज में अस्पतालों पर ताला लटका मिला। ऊंज में अस्पताल का कमरा पुलिसकर्मियों के आवास के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। ड्यूटी से लौटने के बाद पुलिसकर्मी वहीं आराम करते हैं। वार्ड में सामान तितर-बितर पड़ा है। करीब 90 लाख रुपये की लागत से बने अस्पताल का संचालन नहीं हो रहा है। तीनों थानों के अस्पताल वर्ष के 365 दिनों में करीब 320 दिन बंद रहते हैं। सावन में एक माह, कुंभ के दौरान 30 दिन और महाकुंभ के दौरान 45 दिन ही अस्पताल संचालित होते हैं। ये अस्पताल केवल नाममात्र के लिए संचालित हो रहे हैं। सड़क दुर्घटना होने पर मरीजों को रेफर करना डॉक्टरों की मजबूरी बन जाती है।