अति संवेदनशील केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े बंदोबश्त के बीच होलिकाएं दहन की गई।
ज्ञानपुर नगर समेत औराई, घोसिया, गोपीगंज, जंगीगंज, ऊंज, कोइरौना, सीतामढ़ी, धनतुलसी, वीरमपुर, सुरियावां, सुभाषनगर, मोढ़, चौरी, महराजगंज, बाबूसराय सहित जिले के अन्य हिस्सों में होलिकाएं दहन की गई।
बुधवार की रात ज्ञानपुर के पुरानी कलेक्ट्रेट के पास फाग कलाकारों ने एक से बढ़कर एक होली गीत सुनाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसी तरह जिले के अलग-अलग हिस्सों में फाग गीतों पर लोग झूमते रहे।
शुक्रवार को आपसी भाईचारे और सौहार्द्ध का पर्व होली मनाई जाएगी। लोग एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर खुशी मनाएंगे। मान्यता है कि त्रेता युग में हिरण्यकश्यप नामक राक्षस ने अपने बेटे भगवान भक्त प्रह्लाद को मारने की साजिश रची।
उसने अपनी बहन होलिका के गोद में प्रह्लाद को बिठाकर जलाने का प्रयास किया लेकिन ईश्वर की कृपा से प्रह्लाद बच गया और होलिका जल गई। तब से होली से एक दिन पूर्व रात्रि में होलिका जलाई जाने लगी।
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दूकानों पर खरीदारों की उमड़ी भीड़
ज्ञानपुर। होली पर्व की पूर्व संध्या पर बाजारों में अबीर और टोपी आदि की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी। विभिन्न प्रकार की आकर्षक टोपियों संग अबीर, गुलाल और रंग आदि की खरीदारी करने के लिए ज्ञानपुर, गोपीगंज, सुरियावां, भदोही, चौरी समेत अन्य इलाकों में लोगों ने जमकर खरीदारी की।