ज्ञानपुर पुरानी बाजार हनुमंत कुटिया पर हिन्दी दिवस पर बोलते कर्मराज किसलय। संवाद
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ज्ञानपुर। हिंदी का रुतबा विश्व में बढ़ रहा है। वह दिन दूर नहीं जब हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा मिल जाएगा। सरकार को चाहिए कि इसके लिए ठोस पहल की जाए। यह बातें काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी दिवस पर आयोजित गोष्ठी में प्रभारी प्राचार्य डॉ. घनश्याम मिश्र ने कही। इतिहास विभाग की प्रोफेसर कामिनी वर्मा ने अधिकाधिक हिंदी भाषा के प्रयोग करने पर बल दिया, जबकि मध्यकालीन इतिहास के ही डॉ. बालकेश्वर ने हिंदी शब्द की उत्पत्ति एवं विकास पर अपना व्याख्यान देकर श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया। गणित विभाग के डॉ. सर्वेसानांद ने सारगर्भित व्याख्यान और काव्यपाठ किया। विभागाध्यक्ष प्रोफेसर किरण शर्मा ने हिंदी की समृद्ध होती परंपरा पर प्रकाश डाला। हिंदी के महत्व पर इन पंक्तियों ‘इसमें सरिता का वेग प्रखर, कितने स्रोतों के शब्द सुघर, यह भाषा नद है, मत रोको, इसे अपने आप बहने दो’ के माध्यम से व्यक्त किया। मां गंगा शिक्षण संस्थान सीतामढ़ी में प्रधानाचार्य मधू शुक्ला ने हिंदुस्तान में ही हिंदी दिवस का मनाया जाना दुर्भाग्य बताया। कहा कि अभी तक हिंदी को राष्ट्रभाषा भी घोषित नहीं किया जा सका है। जबकि हर राष्ट्र की अपनी भाषा एक पहचान होती है। जबकि हिंदुस्तान जैसे महान राष्ट्र की अपनी कोई भाषा नहीं है। कहा जो चीज विलुप्त होने की कगार पर होता है उसके संरक्षण के लिए एक विशेष दिवस तय किया जाता है। हिंदी भाषी राष्ट्र भारत के लिए यह चिंता का विषय है। इस मौके पर प्रिया सेठ, सोहन सेठ, दान बहादुर, रंजना मिश्रा, मुरलीधर, पलक, आशा, आदि रहे। कार्यक्रम का संचालन गौरव शुक्ला ने किया। दयावंती पुंज डिग्री कॉलेज में प्राचार्या अंजली सिंह और डॉ. अरविंद उपाध्याय ने ‘नफरतों के शोर का डटकर जवाब दीजिए, ये अंग्रेजी का दौर है, हिंदी में जवाब दीजिए’ उन्होंने हिंदी भाषा के विकास और संवर्द्धन पर बात रखते हुए लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस मौके पर डॉ. अनित दुबे, किशोर कुमार पांडेय, आलोक शुक्ला, दीपा गुप्ता, पी.एन. त्रिपाठी, संतोष दुबे, अखिलेश कुमार सिंह, विकास दुबे, स्मृति त्रिपाठी, अविनाश और अखिलेश आदि रहे। केपी मेमोरियल स्कूल सरोई में हिंदी दिवस पर आयोजित गोष्ठी में हिंदी के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। इस मौके पर प्रधानाचार्य सुनील यादव, उप प्रबंधक डॉ. राहुल उपाध्याय आदि रहे। औराई के केशव प्रसाद मिश्र राजकीय महिला महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. वृजकिशोर त्रिपाठी ने हिंदी के व्यवहार, विकास और भविष्य पर अपने विचार को साझा किया। बताया कि आज भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी हिंदी का क्षेत्र बहुत व्यापक है, जहां रोजगार की संभावनाएं अधिक है। संचालन हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कृष्ण कुमार ने किया। इस मौके पर सुचिता वर्मा, अनुज कुमार सिंह, डॉ.आराधना वर्मा, डॉ.आकांक्षा त्रिपाठी, डॉ.रीना सिंह, डॉ. विनोद कुमार मिश्र आदि रहे।
केएनपीजी कॉलेज में हिंदी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में गीत प्रस्तुत करतीं छात्राएं। संवाद- फोटो : BHADOHI