हिंदी दिवस पर सोमवार को जिले में जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित कर हिंदी भाषा की महत्ता पर प्रकाश डाला गया। मातृभाषा हिंदी को देश की भाषा और राष्ठ्र को एकता के सूत्र में पिराने वाला भाषा बताया। वक्ताओं ने हिंदी के विस्तार और विकास के लिए संकल्प भी लिया।
दीवानी न्यायालय परिसर में आयोजित हिंदी दिवस कार्य क्रम में जिलाजज ओम प्रकाश अग्रवाल ने कहा कि हिंदी केवल भाषा ही नहीं बल्कि राष्ट्र की जननी है। हिंदी भाषा बोलने मात्र से भावनाओं में उत्प्रेरणा आ जाता है। उन्होंने लोगों से हिंदी भाषा का महत्व समझने, मातृभाषा में काम करने पर जोर दिया।
इसके पूर्व उन्होंने सरस्वती चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम शुभारंभ किया। अपर जिला जज चंद्रोदय, ने कहा कि हमारी हिंदी मातृभाषा है, हमे इस बात को नहीं भूलना चाहिए। कार्यक्रम में सिविल जज शरद चौधरी, अधिवक्ता पंकज तिवारी, आदित्यशंकर पांडेय, ललित मिश्र,रमाशंकर यादव ने विचार व्यक्त किया।
इस मौके पर न्यायिक अधिकारी अखिलेश पांडेय, सत्यवान सिंह, परवेज अख्तर एवं अधिवक्ता गंगाराम यादव, सुधाकर पांडेय, कैलाशपति शुक्ला, सुशील चौबे, कृष्ण कुमार मालवीय, दीपक रावत आदि मौजूद रहे।
हिंदी साहित्य परिषद की ओर से भिदिउरा स्थित अखंडा नंद आश्रम में हिंदी दिवस समारोह आयोजित किया गया। मुख्यअतिथि जिले के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राम शिरोमणि होरिल ने कहा कि हिंदी एक सशक्त भाषा है, जिसने विश्व में अपनी सशक्त पहचान बनाई है। इसका साहित्य समृद्ध है, किंतु वोट की राजनीति के कारण इसे देश में यथोचित सम्मान नहीं मिल रहा है। साहित्यकार डॉ.विद्याशंकर त्रिपाठी ने कहा कि हिंदी निरंतर विकास की ओर अग्रसर है,
इसका भविष्य उज्ज्वल है। डॉ.राजकुमार पाठक ने कहा कि हिंदी व्यवहार की भाषा है, यह किसी की मोहता ज नहीं। कार्यक्रम में सुरेश पांडेय, हिंदी साहत्यि के कवि पं.पारसनाथ मिश्र, कैलाश चौबे, प्रभुनाथ शुक्ल, दीनानाथ पाठक आदि ने विचार व्यक्त किया।
इसके बाद हुई गोष्ठी में कवियों ने अपनी रचनाओं को पेश किया। इसमें पं. उमाशंकर मिश्र, दयाराम पाठक, प्रेम जौनपुरी, कन्हैयालाल दुबे, हंसराज तिवारी, एकल बनारसी, चंद्रभूषण, योंगेंद्र आदि रहे।
नेहरू युवा केंद्र की ओर से हिंदी दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। केंद्र के प्रतिनिधि उदयभान सिंह ने हिंदी की तीन स्थितियों के बारे में बताया। कहा कि हिंदी हमारे बीच में संपर्क, राष्ट्र और मातृभाषा के रूप में मौजूद है।
राजकीय कामकाज की भाषा के रूप में हिंदी को 14 सितंबर को 1949 को मान्यता मिली, लेकिन हिंदी अब भी दोयम दर्जे की भाषा बनी हुई है। इस मौके पर नीरज रावत, कुमार शिवम, मजुला मौर्यद्व गुडिय़ा मौर्य, सीमा भारती, मनु रावत, रागिनी मौर्य ने गीत प्रस्तुत किया। राजकुमार श्रीवास्तव, सतीश दुबे आदि रहे।
ज्ञानपुर। हिंदी दिवस पर सोमवार को जिले में विभिन्न संगठनों की ओर से गोष्ठी और कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें मातृभाषा के मर्म को समझाते हुए उसकी अहमियत पर ध्यान देने के लिए आह्वान किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि सरकारों के लचर रवैए से हिंदी की दुर्दशा हो रही है। घोसिया संवाददाता के अनुसार, लायंस क्लब ज्ञानपुर की ओर से जयरामपुर स्थित आदर्श बाल निकेतन जूनियर हाईस्कूल में गोष्ठी का आयोजन किया गया। सेवानिवृत्त प्रोफेसर डा. मनमोहन शुक्ला ने मातृभाषा, मर्म को समझाया। सरकारों के लचर रवैए से हिंदी की दुर्दशा हो रही है। बीएसए डा. सत्य प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि अंग्रेजीयत हावी नहीं हो।।