ज्ञानपुर। फरवरी महीने में हर चार से पांच दिन के अंतराल में हुई बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। यह बारिश गेहूं की फसल के लिए तो ठीक रही, लेकिन दलहनी और तिलहनी फसलों के लिए नुकसानदेह साबित हो रही है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस साल फरवरी में 77 एमएम बारिश हुई है। यह बीते पांच सालों में फरवरी माह में सबसे अधिक बारिश का रिकॉर्ड है। जिले में इस साल पूरे फरवरी माह में उतार-चढ़ाव का मौसम बना रहा। हर तीन से चार दिनों के अंतराल में मौसम में बदलाव होने के साथ बारिश भी हो रही थी। शुरू में तो यह बारिश गेहूं की फसलों के लिहाज से ठीक थी, लेकिन आखिरी में तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने गेहूं की अगैती फसलों को भी नुकसान पहुंचाया। तेज हवा होने के कारण कई जगहों पर गेंहू की फसल लोट गई। हालांकि बारिश ने तिलहनी की फसलों को अधिक नुकसान पहुंचाया है। कृषि केंद्र बेजवां से मिली जानकारी के मुताबिक इस साल फरवरी में कुल छह दिन बारिश दर्ज किया गया है। इस दरम्यान कुल 53 मिमी बारिश दर्ज किया गया है। पश्चिमी विक्षोम के कारण निरंतर मौसम का मिजाज बदलता रहाता है। फरवरी में 11, 13 और 14 तारिख को दस मिमी से अधिक बारिश दर्ज हुआ है। जिसमें चना, मटर, सरसों के अलावा गाजर, आलू, मूली की ऐसी फसलें जो खेत में ही थी। उनको काफी नुकसान हुआ। बेमौसम बारिश से किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। आंकड़ों की माने तो इस साल फरवरी माह में पिछले पांच सालों के रिकार्ड को उठा कर देखे तो सबसे अधिक बारिश हुई है।मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस फरवरी माह में 77 एमएम बारिश हुई, जो साल 2023 में 53 एमएम बारिश से 14 एमएम ज्यादा है। वहीं बीते पांच सालाें में भी यह आंकड़ा ज्यादा है। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के मौसम विशेषज्ञ सर्वेश बरनवाल ने बताया कि इस साल फरवरी में खुब बारिश हुई है। फरवरी माह में हर तीन से चार दिनों के अंतराल में बारिश हुई। पूरे माह कुल 77 एमएम बारिश हुई है। इससे तिलहनी की फसलों को नुकसान हुआ है।