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आयुष्मान योजना: गोल्डेन कार्ड से वंचित 11 हजार लाभार्थी

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ज्ञानपुर। मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना को एक साल पूर्ण हो गए, लेकिन अब भी 11 हजार से अधिक लाभार्थियों को गोल्डेन कार्ड नहीं मिल सका है। इससे वह अपने परिवार का उपचार पैनल में शामिल अस्पतालों में नहीं करा सके। 94 हजार 867 लाभार्थियों में से लगभग 11 हजार लोगों को गोल्डेन कार्ड नहीं मिला। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि कैंप लगाकर कार्ड वितरित कराए गए, लेकिन हकीकत इससे थोड़ी अलग है।
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बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के चलते सभी लोग महंगा उपचार नहीं करा पाते। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने एक वर्ष पूर्व आयुष्मान योजना को लागू किया। 2011 की आर्थिक जनगणना के आधार पर जिले में 94 हजार 867 लोगों का चयन इस योजना के लाभार्थियों के रूप में किया गया। 23 सितंबर 2018 को शुरू हुई योजना के एक साल पूर्ण हो गए। योजना में परिवार के सदस्यों को लाभ देने के लिए गोल्डेन कार्ड बने और वितरण भी शुरू किया गया, लेकिन योजना की नींव सर्वे कार्य में गड़बड़ी ने हिला दी। एक साल से अधिक समय गुजरने के बाद भी 83 हजार लाभार्थियों के हाथ में कार्ड पहुंच सके हैं, जबकि 11 हजार से अधिक लाभार्थी अब भी आयुष्मान योजना के गोल्डेन कार्ड से वंचित हैं। कार्ड पाने वाले लोग तो सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में उपचार कराने के पात्र बन गए, लेकिन जिन्हें कार्ड नहीं मिल सका, वह लोग अपनों का उपचार नहीं करा पाने को लेकर मायूस हैं। सबसे ज्यादा दर्द में ऐसे लोग हैं, जो गरीब हैं, लेकिन 2011 की सर्वे सूची में उनका नाम गरीबीक रेखा के नीचे नहीं है। ऐसे तमाम लोगों ने कर्ज आदि लेकर निजी अस्पतालों में उपचार कराया। योजना में जिले के दो सरकारी और 19 निजी अस्पतालों का चयन किया गया है। अब तक 3213 मरीज आयुष्मान योजना का लाभ ले चुके हैं।
तकनीकी खामियां बढ़ा रहीं दिक्कत
ज्ञानपुर। आयुष्मान भारत योजना में कई लाभार्थियों के गोल्डेन में समस्या हो गई है। उनके नाम, पता से लेकर मुहल्ला तक सही न होने पर वह अस्पतालों में उपचार कराने में असमर्थ हो जा रहे हैं। अभोली ब्लॉक के नीबी गांव निवासी सरबजीत ने कहा कि गोल्डेन कार्ड में उनका नाम सर्वजीत हो गया है, जिससे अस्पताल उसे नहीं ले रहे हैं। यह इकलौता मामला नहीं है। कई कार्डों में ऐसी समस्याएं सामने आईं हैं। उन्हें दुरुस्त कराने के लिए जिला अस्पताल में स्थित आयुष्मान केंद्र पर लोग पहुंच रहे हैं।
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हजारों पात्र अब भी योजना से वंचित
ज्ञानपुर। आयुष्मान भारत योजना में 2011 की आर्थिक जनगणना के आधार पर ही लाभार्थियों का चयन हो गया है जबकि हजारों की संख्या में वास्तविक पात्र योजना से वंचित हैं। अपवाद छोड़ दिए जाएं तो मुसहर समाज जो कि अति निर्धन है, उनके एक भी कार्ड नहीं बने। इसी तरह अलग-अलग बिरादरी के पात्र योजना का लाभ नहीं पा सके। ऐसे में ज्यादातर सरकारी योजनाओं का लाभ ऐसे लोग पाते हैं, जो हकीकत में पात्र नहीं होते।
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