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हजारों गरीब आयुष्मान के लाभ से वंचित

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ज्ञानपुर। आयुष्मान योजना में मुख्य समस्या सर्वे की गड़बड़ी मानी जा रही है। लंबे समय तक बीपीएल सूची में रहे बड़ी तादाद में लोग रहस्यमय तरीके से सूची से बाहर कर दिए गए हैं। जबकि बिल्डिंग और कार वालों को गरीब बनाकर योजना का लाभ दिया जा रहा है। इससे गरीबों और पात्रों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। उन्हें कोई फायदा नहीं मिल रहा। सर्वे के दौरान ग्राम प्रधान के सुझाए नामों अथवा घर बैठे ही
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सर्वे कर गरीबों का नाम बीपीएल सूची के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी निभाने वाले तमाम आशा कार्यकर्ताओं की लापरवाही आयुष्मान योजना के मकसद को पूरा नहीं होने दे रही। अगर सही ढंग से सर्वे रिपोर्ट तैयार की गई होती तो आयुष्मान योजना का लाभ लेने के लिए दर-दर भटक रहे तमाम गरीबों की मुश्किलें कम हो जातीं। सर्वे की जिम्मेदारी निभा रहे लोगों ने बिना गहराई में गए गरीबों की सूची तैयार कर ली। सर्वे में 94867 परिवार पात्र पाए गए। खास बात यह कि उनके सर्वे के मुताबिक चयनित सभी गरीबों को भी गोल्डेन कार्ड नहीं मिल पाया। लगभग 12 हजार से अधिक लोग इसमें भी कार्ड मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इससे इतर जो गरीब परिवार सर्वे की सूची में शामिल ही नहीं हो पाए, उनकी संख्या भी हजारों में है। तमाम ग्रामीणों का आरोप है कि सर्वे कब और कहां हुआ, कोई जानता ही नहीं। दरअसल सर्वे करने वालों ने ग्राम प्रधान से परामर्श लेकर या एक ही स्थान पर बैठ कर गरीबों की सूची तैयार कर ली। इसमें तमाम ग्राम प्रधानों ने अपने हिसाब से गरीबों का नाम डलवा दिया। तमाम गरीबों का कहना है कि यही पक्षपात सरकार की मंशा को पूर्ण नहीं होने दे रहा। खास बात यह है कि सर्वे की गड़बड़ी का शिकार हुए गरीबों की मदद कोई नहीं कर पा रहा। उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि वे कहां जाएं। लाचार होकर तमाम लोग अब 2021 की गणना और सर्वे का इंतजार करने लगे हैं।
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चौरी क्षेत्र के भदरमनपुर गांव निवासी आरएस तिवारी का कहना है कि आयुष्मान के लिए किस प्रकार सर्वे हो गया पता ही नहीं चला। तमाम पात्रों और जरूरतमंदों का नाम सूची में नहीं है। सर्वे करने वालों की गड़बड़ी से गरीबों को 2021 तक का लंबा इंतजार करना पड़ेगा। कोई रास्ता सुझाने वाला नहीं है। गांव के लोगों को इसकी जानकारी भी नहीं है।
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नागमलपुर गांव निवासी एक महिला ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए बताया कि 2011 की बीपीएल सूची में मेरा नाम होना आश्चर्यजनक है। आर्थिक तंगी में दिन कट रहे हैं। अगर पात्रों को योजना का लाभ नहीं मिलेगा तो किसे मिलेगा। ऐसे लोगों का कार्ड बना दिया गया, जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं और गरीब चक्कर काट रहा है।
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अस्पतालों में सुविधाएं नदारद
भदोही जिले में 22 अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत चयनित किए गए हैं। इनमें जिला अस्पताल और भदोही नगर स्थित एमबीएस दो निजी अस्पताल भी शामिल हैं। गिनती के अस्पतालों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर अस्पतालों में सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में इन अस्पतालों में दवा-इलाज कर रामभरोसे होकर रह गया है।
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कार्ड बांटने में भी हीलाहवाली
सर्वे में गड़बड़ी के बाद अब गोल्डेन कार्ड बांटने में भी हीलाहवाली हो रही है। यही वजह है कि तमाम लोगों को आयुष्मान योजना का गोल्डेन कार्ड बनने के बाद भी नहीं मिल सका। आशा कार्यकर्ता उन्हें चक्कर कटवा रही हैं। अभोली ब्लॉक के जगतपुर गांव निवासी लालजी का कहना है कि उनका आयुष्मान योजना का कार्ड बन गया है, लेकिन अब तक मिला नहीं। पूछने पर बताया गया कि आपका कार्ड बनकर आ गया है। लेकिन, जब मांगा तो बहानेबाजी होने लगी। इसके पीछे क्या मंशा है, समझ नहीं आ रहा। इसी तरह बड़ी संख्या में ग्रामीण कार्ड बनने के बाद भी उसे प्राप्त नहीं कर पाए हैं।
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