वादकारियों को कोई दिक्कत न हो इसके लिए न्यायालय परिसर में हेल्प सेंटर भी स्थापित किया जाएगा।
वह शुक्रवार को दीवानी न्यायालय परिसर में स्थित कक्ष में पत्रकारों से मुखातिब हुए।
उन्होंने कहा कि न्यायालयों पर बढ़ते काम के बोझ को देखते हुए लोक अदालत के माध्यम से ज्यादातर मामलों का निस्तारण करने का प्रयास किया जा रहा है।
सरकार की मंशा है कि जनता सीधे जुड़कर इसका लाभ उठाए। न्यायालय से लेकर अन्य विभागों में एक से दो दशक पुराने मामलों को सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि न्यायालय में जो फैसला दिया जाता है उसके खिलाफ प्रतिवादी हाईकोर्ट में रिट कर सकता है लेकिन लोक अदालत में होने वाले फैसले के खिलाफ कहीं कोई रिट मान्य नहीं होगा।
जनता लोक अदालत में नि:शुल्क पंजीयन कराकर वादों का निस्तारण करा सकेगी। वादकारियों को कोई दिक्कत न हो इसके लिए हेल्प सेंटर भी स्थापित किया जाएगा।
विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के तहत सभी को लाभान्वित किया जाएगा। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और लाभ उठाएं।