करीब एक करोड़ खर्च कर जिले के 30 आंगनबाड़ी केंद्रों की सेहत सुधारी जाएगी। सीडीओ के निर्देश पर हर ब्लॉक से पांच-पांच केंद्र का चयन कर ब्लॉकों को प्रस्ताव भेजा गया है। एक-एक केंद्र पर तीन-तीन लाख रुपये खर्च होंगे।
जिले में 1496 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इसमें सवा लाख बच्चे पंजीकृत हैं। एक से दो दशक पूर्व बने आंगनबाड़ी केंद्र निगरानी एवं देखरेख न होने से जर्जर हो चुके हैं। जिले के 747 आंगनबाड़ी केंद्र प्राथमिक विद्यालयों के भवनों और 174 पंचायत भवन में चल रहे हैं। इसके अलावा 450 आंगनबाड़ी केंद्र खुद के भवन में और 150 किराये के कमरे में संचालित हो रहे हैं। कई भवन तो बैठने लायक तक नहीं हैं। अब इन भवनों की सुधि प्रशासन ने ली है। मुख्य विकास अधिकारी यशवंत कुमार सिंह के निर्देश पर बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने हर ब्लॉक से पांच-पांच केंद्रों की सूची ब्लॉकों पर भेजी है। इसमें सुरियावां ब्लॉक के अबरना, बहुता चकडाही, मधुपट्टी, तुलापुर, महुआपुर, औराई में भरतपुर, सायर, कैयरमऊ, दिघवट, बरजीकला, अभोली में अभोली, भीखापुर, नागमलपुर, जगतपुर, कुढ़वा सहित अन्य शामिल हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी मंजू वर्मा ने बताया कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर छह ब्लॉक से 30 केंद्रों की सूची भेजी गई है। पंचायत निधि और मनरेगा से ही मरम्मत कार्य होगा। उन्होंने बताया कि एक-एक केंद्र पर ढाई से तीन लाख रुपये खर्च होंगे।
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वन, मरम्मत ही सहारा
ज्ञानपुर। जिले में हर वर्ष नए भवन स्वीकृत हो रहे हैं, लेकिन उनकी संख्या सीमित है। 2021 में सात, 2022 में 11 भवन स्वीकृत हुए। इससे मरम्मत कर पुराने भवनों को बेहतर किया जाएगा। केंद्रों की हालत यह है कि 439 केंद्रों में पेयजल की व्यवस्था नहीं है और 628 में शौचालय की सुविधा तक नहीं है। डीपीओ मंजू वर्मा का कहना है कि हर साल नए भवन सीमित संख्या में बन रहे हैं। संवाद