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हनुमान जन्म, अहिल्या उद्धार लीला का लिया का मंचन

Mon, 12 Oct 2015 01:48 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, भदोही
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स्थान पाने के लिए श्रद्धालू समय पूर्व ही पहुंच जा रहे हैं और देर रात्रि कार्यक्रम समापन के बाद ही घर लौट रहे।
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पांचवे दिन असुर वृतासुर भगवान शंकर की कठोर तपस्या कर उनसे भस्म कंगन प्राप्त कर लिए और फिर अत्याचार करना शुरु कर देता है। वह जिसके सर पर हाथ रख देता था वह भस्म हो जा रहा था। उसका अत्याचार देख कर नारद जी उसे शिवजी के पास जा कर उनसे उनकी पत्नी पार्वती को मांगने के लिए कहते हैं। तब अहंकार में चूर भस्मासुर कैलाश पर्वत जाकर शिवजी से पार्वती जी को अपनी पत्नी बनाने के लिए मांगता है। शिवजी के इंकार करने पर भस्मासूर भस्म कंगन पहन कर शिव जी को भस्म कर पार्वती से विवाह करने के लिए दौडा लेता है। जहां शिवजी भागते भागते विष्णु लोक पहुंचते है और अपनी रक्षा को कहते हैं। तभी विष्णु जी एक सुंदरी का रुप धारण कर भस्मासुर के सामने उपस्थित हो जाते है भस्मासुर उनपर मोहित हो कर उनसे विवाह के लिए कहता है। सुंदरी भस्मासुर से शर्त रखती है की वे उसके संग नृत्य करेंगे। शर्त स्वीकार कर भस्मासुर नृत्य करने लगता है और अपने ही सर पर हांथ रखकर स्वयं भस्म हो जाता है। यह सबकुछ देख कर जैसे दर्शको जीवंत हो उठते हैं।
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विष्णु जी के सुंदरी का रूप धारण करने और उनकी सुंदरता देख कर शिव जी का तेज गिरने और पवन देव तेज अंजनी के शरीर में तेज का प्रवेश कराने की लीला ने भी लोगों का मन मोह लिया। अंजनी का वानर केसरी से विवाह, हनुमान जन्म होता है और अहिल्या उद्घार का प्रसंग भी लोगों को काफी रोचक लगा। रामलीला देखने के लिए आए नगर के गणमान्य अशोक गुप्ता, विपिन दूबे, सुरेंद्र गुप्ता का परिषद द्वारा अंगवस्त्रंम भेंट कर सम्मानित किया गया। स्वागत करने वालों में सीताराम गुप्ता, विनीत बरनवाल, सुभाष मौर्य, भरत जयसवाल, सतीश गुप्ता, राजेश जयसवाल, प्रिंस गुप्ता, पन्ना लाल यादव, सत्यशील जयसवाल, धर्मराज गुप्ता, ब्रम्ह जायसवाल, सत्यप्रकाश बिंद आदि थे।
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