ज्ञानपुर। जिले में रिकार्ड धान खरीद होने के बाद अब किसानों के भुगतान की समस्या जटिल हो गई है। डेढ़ हजार किसानों का 10 करोड़ से अधिक का भुगतान लटक गया है। आरटीजीएस से भुगतान की प्रक्रिया पीएएफएमएस में व्यवस्था प्रभावी होने के बाद स्थिति विकट हुई। अकेलेे पीसीएफ की खरीद एजेंसियों पर 700 किसानों का भुगतान लटका है। भुगतान को लेकर किसान क्रय केंद्रों का चक्कर लगा रहे हैं।
फसल समर्थन मूल्य योजना के तहत जिले में किसानों को धान बेचने के लिए 42 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इसमें विपणन शाखा, पीसीएफ, कर्मचारी कल्याण निगम, यूपी एग्रो, यूपीएसएस, एफसीआई शामिल है। एक नवंबर से शुरू हुई धान की खरीद के लिए जिले को 86 हजार 900 एमटी का लक्ष्य मिला था। करीब ढाई महीने में लक्ष्य के सापेक्ष विभाग की ओर से एक लाख 10 हजार 794 एमटी की खरीद हो गई। इसमें 11 हजार 292 किसानों से खरीद हुई। पूर्व के वर्षों में आरटीजीएस से ही भुगतान होता था लेकिन इस बार पीएफएमएस से किसानों के खाते में पैसा भेजने की कवायद शुरू की गई। शुरुआती दौर में भुगतान प्रक्रिया ठीक रही लेकिन अब डेढ़ हजार किसानों का पैसा एजेंसियो के पास लटक गया है। 11 हजार 292 किसानों में 1500 का 10 करोड़ का भुगतान लटका है। ऐसे में किसान जहां क्रय केंद्र का चक्कर लगा रहे हैं, वहीं जिम्मेदार पोर्टल पर सत्यापन होने के बाद भुगतान की बात कहकर किसानों को बैरंग वापस लौटा रहे हैं। इसको लेकर किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी श्याम कुमार मिश्रा ने कहा कि एजेंसियों की ओर से पोर्टल पर डाटा अपलोडिंग के बाद अभिलेखों का ऑनलाइन मिलान किया जाता है। पोर्टल पर ऑनलाइन मिलान के दौरान किसानों के आधार, बैंक पास बुक और खतौनी का मैच कराया जाता है। जिन किसानों का भुगतान नहीं हुआ उनकी ओर से दी गई जानकारी सही नहीं है। डाटा मिलान की प्रक्रिया पूरी होते ही किसानों को भुगतान किया जाएगा। कुछ एजेंसियों में पहली बार पीएफएमएस की व्यवस्था प्रभावी हुई है, इससे भी समस्या हो रही है।