कलनुआ में भीगे धान की फसल को किनारे करते किसान। संवाद
- फोटो : उद्घाटन सत्र के दौरान ईको टूरिज्म केंद्र पर पौधारोपण करते जनप्रतिनिधि व वन विभाग के अधिकारी। स्त्रोत: विभाग
ज्ञानपुर। औराई निवासी किसान मेंहीलाल चकहर दयाल के बेटे की इसी महीने 18 नवंबर को शादी है। घर में शादी की तैयारियां चल रही हैं। इस बीच आसमान से बरसी आफत ने उनकी खुशियों में खलल डाल दिया। दो लाख रुपये का लोन लेकर पांच बीघे में की गई उनकी खेती बारिश से बर्बाद हो गई। अब शादी की चिंता के अलावा कर्ज का बोझ भी बढ़ गया है। मेंहीलाल की तरह ही जिले के सैकड़ों किसानों के अरमानों पर बारिश ने पानी फेर दिया है। कर्ज के बोझ तले दबे किसानों के सामने विकट समस्या खड़ी हो गई है। मोंथा चक्रवात के असर के कारण जिले में अप्रत्याशित बारिश हुई। बीते पांच दिनों से सूर्यदेव के दर्शन नहीं हो चुके हैं। वहीं तीन दिनों में 65 एमएम से अधिक बारिश हो चुकी है। 2019 के बाद इतनी अधिक बारिश अक्तूबर में दर्ज की गई। बारिश से आलू की बोई गई 50 हेक्टेयर फसल जहां चौपट हो गई। वहीं 500 हेक्टेयर धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। वहीं खेतों में खड़ी किसानों की धान की फसल अब बर्बादी के कगार पर आ गई है। जिले में 47 हजार हेक्टेयर में धान की खेती की गई है। जिसमें अब तक 20 फीसदी से अधिक धान की सफल बर्बाद होने की संभावना जताई जा रही है। इस बीच जिले के सैकड़ों किसानों के खेतों में फसलें जलमग्न हो गई हैं। निजी और सरकारी लोन लेकर खेती करने वाले किसानों के सामने अब विकट समस्या आकर खड़ी हो गई है। एक तरफ फसल बर्बाद हो चुकी है। वहीं दूसरी तरफ कर्ज भी चढ़ गया। बारिश के बाद किसान अपनी बर्बादी पर आंसू बहा रहे हैं।