गांव में ऐसी गंदगी है व्याप्त।
- फोटो : अमर उजाला
गांव पुरुषोत्तमपुर की प्रधान चंदा देवी कहती हैं, वह गृहिणी हैं। घर-परिवार की जिम्मेदारी है। पति पूर्व प्रधान हैं। वह अपने पति के साथ ही ब्लॉक में होने वाली बैठकों में जाती हैं। पति ही उनका काम संभालते हैं। नीति आयोग और मेरी पंचायत मोबाइल एप से अनभिज्ञ चंदा देवी कहती हैं कि पंचायत में नाला, नाली निर्माण, पंचायत भवन, खड़ंजा जैसे कई विकास कार्य कराए हैं। गांव जयरामपुर की प्रधान रेखा देवी से पहले उनके परिवार के दो सदस्य प्रधान रह चुके हैं। कहती हैं, परिवार बड़ा और संयुक्त है इसलिए वह घर से बाहर ज्यादा नहीं जाती हैं।
महिला प्रधानों को एंड्रायड मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जाता है। कुछ महिला प्रधान कम पढ़ी-लिखी हैं, उनके साथ सामंजस्य में समस्या आती है। वह मुख्यालय पर बैठक में पतियों के साथ शामिल होती हैं। - दिलीप कुमार पासी, बीडीओ, औरा
बजबजाती गंदगी से परेशान होते हैं ग्रामीण।
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दिन भर घर में रहेलीन, ऊ का बात करीहन, बोल भी न पइहन
12 महिला ग्राम प्रधानों से मोबाइल फोन पर संपर्क किया गया मगर उनके प्रतिनिधियों ने ही फोन उठाया। इनमें से सिर्फ चार महिला प्रधानों के प्रतिनिधि ही बात कराने के लिए तैयार हो सके। अन्य महिला प्रधानों के प्रतिनिधियों का सीधा कहना था कि उन्हें कुछ न पता होई, सब कामकाज हम लोग ही करिला। दिन भर घर में रहेलीन, ऊ का बात करीहन, बोल भी न पइहन।
दावों से उलट है गांवों की तस्वीर
नीति आयोग के आकांक्षी विकासखंड कार्यक्रम के तहत औराई ब्लॉक में पांच बिंदुओं स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, कृषि संबद्ध सेवाएं, आधारभूत संरचना और सामाजिक विकास के क्षेत्र में काम कराए गए। बेहतर काम करने पर औराई को एक करोड़ रुपये का पुरस्कार मिला है, लेकिन ग्राम पंचायतों की जमीनी हकीकत इससे जुदा है।
बारीगांव चकजोधी के पंचायत भवन में लाइब्रेरी के नाम पर अलमारी में दो-चार पुरानी किताबें रखी हैं। आदर्श तालाब में नाम मात्र का पानी था। गांव जयरामपुर में इंटरलॉकिंग सड़क पर कीचड़ और नाली का पानी बह रहा है। गांव का गंदा पानी एक तालाब में जा रहा जिससे तालाब अपना अस्तित्व खो चुका है।