वह यहां तीन दिन तक रुके और तीन छंदों की रचना की, जो कवितावली में 38, 39 और 40वें छंद के रूप में संकलित हैं। तुलसी साहित्य के प्रचार-प्रसार में भदोही जिले के महर्षि शिवव्रत लाल और महावीर प्रसाद मालवीय (वीरकवि) का महत्वपूर्ण योगदान है।
उक्त उदगार रामचरित मानस की पांडुलिपियों पर गहन अध्ययन कर चुके जिले के वयोवृद्घ साहित्यकार डा. उदयशंकर दुबे ने व्यक्त किया।
वह शुक्रवार को हिंदी साहित्य परिषद एवं मानस प्रचार समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चित्रकूट अखंडाश्रम भिदिउरा में आयोजित तुलसी जयंती समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
इस मौके पर हिंदी साहित्य परिषद की ओर से डा. दुबे को तुलसी साहित्य सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिले के विद्वान डा. विद्याशंकर त्रिपाठी ने तुलसीदास को भारतीय संस्कृति का रक्षक बताया।
वक्ताओं ने कहा कि तुलसीदास केवल कवि नहीं, बल्कि लोकनायक थे।
उन्होंने अपनी रचनाओं के जरिए समाज में व्याप्त विभिन्न प्रकार की कुरीतियों और भेदभाव पर प्रहार किया। डा. राजकुमार पाठक ने तुलसी और रामचरित मानस पर आधारित कजरी और गीत सुनाए।
कार्यक्रम में पं. पारसनाथ मिश्र, कैलाश नाथ चौबे, जयशंकर पांडेय, शीतला प्रसाद गुप्त, शीतला प्रसाद पांडेय, दीनानाथ पाठक आदि ने तुलसीदास के कृतित्व पर प्रकाश डाला।
कहा कि वे शास्वत कवि थे। पं. हंसराज तिवारी, प्रेम जौनपुरी, योगेंद्र मिश्र, चंद्रभूषण पाठक आदि ने कविता के जरिए तुलसी का स्मरण किया। इस मौके पर हरिभूषण, राम गोपाल, राम लोलारख दुबे, कमलाशंकर, रजनीश पाठक, मोहन, शिवराम आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन पं. उमाशंकर मिश्र शांकरी ने किया। अंत में डा. सुरेश पांडेय मंजुल ने आभार ज्ञापन किया।