ज्ञानपुर। कोरोना संक्रमण की महामारी ने देशव्यापी आर्थिक संकट खड़ा कर आम परिवारों को विषम परिस्थितियों से गुजरने के लिए विवश कर रहा है। ऐसे संकट में बकरी का पालन कर प्रवासियों समेत आम पशुपालन आय की स्रोत बढ़ा सकते हैं। पालन करते समय नस्ल के चयन में विशेष सावधानियां बरतने से लागत से कई गुना आय अर्जित किया जा सकेगा।
इस संबंध में केवीके बेजवां के पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डा.गोविंद चौधरी ने बताया कि महामारी के कारण कोने-कोने से लाखों मजदूरों का पलायन एक-दूसरे स्थान की ओर देखा जा रहा है। देश में लगभग 3.3 अरब श्रमिक हैं इसमें दो अरब नौकरी पेश और संगठित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्र में है। असंगठित क्षेत्र वाले मजदूरों की रोजी-रोटी पर आफत आई है जिससे बेरोजगारी का सामना मजदूर कर रहे हैं। ऐसे संकट से उबरने के लिए पशुपालन रोजगार का एक बड़ा माध्यम साबित होगा। प्रमाण भी है कि सूखे और महामारी में पशुपालन की ओर लोगों रुझान बढ़ना स्वाभाविक है। क्योंकि इसमें कम लागत होने के साथ आजीविका का विकल्प मिलता है। बकरी का पालन शुरू करने से पहले नस्लों के बारे में जागरूक होना जरूरी है। नस्ल का चयन कर जमुनापारी, बरबरी, सिरोही, विट्ठल तोतापरी, ब्लैक बंगाल, जौनपुरी बकरियों का पालन अधिक आय देता है। झाड़ियों के पत्ते, जंगली घास, पौधों की पत्तियां, खरपतवार आदि सेवन करती है। ध्यान रहे कि बकरियां मौसम के अनुकूल हैं इन्हें ठंड के मौसम में धूप के निकलने और बरसात के दिनों में दलदल वाले स्थानों पर चराने से परहेज करना चाहिए। अगर चराने के लिए जगह पर्याप्त है तो दाना देने की जरूरत नहीं पड़ती लेकिन ज्यादा वजन, उत्पादन लेने के लिए कुछ दानों का मिश्रण देना चाहिए। खनिज मिश्रण-77 देने से लगभग 25 फीसद वजन और मेमनों के विकास में तेजी, प्रजनन समस्या में कम आती है। संक्रामक बीमारियां जैसे बकरी प्ले, इंटेरो टॉक्सेमिया, खुरपका-मुंहपका, निमोनिया काफी घातक होते है। बचाव के लि ए टीकाकरण अवश्य कराए। टीके की दवा बाजार, सरकारी पशु अस्पताल पर आसानी से मिलती है। केंचुआनासी दवा वर्ष में दो बार निश्चित रूप से दी जाए इससे न सिर्फ स्वास्थ्य मजबूत रहता है बल्कि वृद्धि दर बेहतर रहती है। पालन में छोटे भूमिहीन किसानों-बेरोजगार, नवयुवक आगे आकर रोजगार को एक नई दिशा दे सकते हैं।