कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पूर्व विभागाध्यक्ष दर्शन शास्त्र एवं पूर्व कुलपति डॉ. बी.पांडेय ने मानव जीवन के कर्तव्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही गीता को मानव मात्र का ग्रंथ बताया।
उन्होंने कहा कि गीता में संपूर्ण के कल्याण की कामना की गई है, मोक्ष का मार्ग भी बताया गया है। कहा कि मोक्ष बिना कामना से किए गए कर्म से मिलता है,न कि बंधनयुक्त कर्म करने से। इसलिए गीता एक मध्यमार्गी ग्रंथ भी है।
अध्यक्षता प्राचार्य डॉ.विजय प्रताप सिंह ने किया। स्वागत विभागाध्यक्ष डॉ. सविता भारद्वाज ने किया। आभार डॉ. किशोरीलाल पांडेय ने जताया। संचालन महेंद्र कुमार, डॉ. दीप नारायण ने किया।
इस मौके पर डॉ. डीपी चतुर्वेदी, डॉ. क्षमा शंकर पांडेय, डॉ.एचपी सिंह, डॉ. भारतेंदू द्विवेदी, डॉ. घनयाम मिश्र, डॉ. एके वर्मा, डॉ. आलिया रिफत, डॉ. ऋचा यादव, डॉ. रोशन प्रसाद, डॉ. आईपी पांडेय, डॉ. डीएन सिंह, डॉ. महेंद्र त्रिपाठी आदि रहे।