फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घाटों पर सफाई, देर शाम तक बनीं वेदियां

Tue, 17 Nov 2015 01:56 AM IST
ब्यूरो, भदोही, अमर उजाला
विज्ञापन
विज्ञापन
 सूर्योपासना के चार दिवसीय अनुष्ठान डाला छठ के दूसरे दिन सोमवार को व्रती महिलाओं ने खीर (खरना) खाकर मंगल कामना की। व्रती महिलाएं मंगलवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी।
विज्ञापन


छठ पूजा को देखते हुए बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई है। आयोजन के निमित्त लोग प्रमुख सरोवरों को साफ करते दिखे। हालांकि रामपुर और सीतामढ़ी के गंगा घाटों पर साफ-सफाई के नाम पर प्रशासन की ओर से कुछ नहीं किया गया है। लोगों को गंदगी के बीच ही सूर्य को अर्घ्य देना पड़ेगा। 

छठ पर्व के मद्देनजर बाजार में दूकानों पर फल खरीदने के लिए गांव देहात से भी लोग पहुंचे। त्योहार को लेकर फलों की कीमतों में भारी उछाल देखा गया। इसकी कीमतें प्रतिकिलो 20 रुपये से 30 रुपये तक बढ़ गई थीं। डुहियां के पं. दीनानाथ शुक्ल ने बताया कि मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल से हुई थी। सबसे पहले सूर्य पुत्र कर्ण ने सूर्यदेव की पूजा शुरू की।
विज्ञापन


कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे और प्रतिदिन घंटों पानी में खड़े होकर अर्घ्य देते थे। सूर्यदेव की असीम कृपा से वह महान योद्धा के रूप में विख्यात हुए। सूर्यदेव के प्रति कर्ण की निष्ठा एवं अर्घ्य देने की परंपरा आज भी छठ पर्व में चली आ रही है। इस पर्व के बारे    में एक कथा और भी है।  

         इसके तहत जब पांडव सारा राजपाट जुए में हार गए, तब द्रौपदी ने छठ का व्रत रखा था। इसका फल भी उन्हें मिला और पांडवों को राजपाठ वापस मिल गया। किंवदंतियों के अनुसार बताया जाता है कि सूर्यदेव और छठी मइया का संबंध भाई-बहन का है। इसलिए छठ के मौके पर निर्जला व्रत रखकर श्रद्धालु सूर्य की आराधना करते हैं ताकि दोनों प्रसन्न होकर उनका कल्याण करें।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें