सीतामढ़ी। उफनाई गंगा अब हाहाकार मचाने के मूड में दिखने लगी हैं। रविवार को ढाई सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर बढ़ रहा था। शाम तक जलस्तर 80.500 मीटर तक पहुंच गया, जो खतरे के निशान से सिर्फ 70 सेमी नीचे है। बढ़ते जलस्तर से तटवर्ती कई गांव में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। गोपीगंज के रामपुर घाट से 75 महिलाओं और बच्चों को राहत शिविर में भेजा गया, जबकि छेछुआं, कलिकमवैया, मवैयाथानसिंह सहित अन्य राहत शिविरों में अधिकारियों की टीम सुविधा पहुंचाने में जुटी रही। बाढ़ के पानी से तटवर्ती गांव की करीब एक हजार बीघे से अधिक फसल डूबकर नष्ट हो गई है।
हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़े जाने और पहाड़ी क्षेत्र में हो रही बारिश से गंगा का जलस्तर पिछले चार दिनों से तेजी से बढ़ रहा है। इससे तटवर्ती गांव में पानी पहुंचने लगा है। कोनडिया के छेछुआ गांव में दो दिन पूर्व ही 150 लोगों को राहत शिविर में प्रशासन ने पहुंचा दिया था। दलित बस्ती में दो फीट से अधिक पानी भर गया है। एडीएम शैलेंद्र मिश्र, एसडीएम योगेंद्र कुमार समेत अधिकारियों की टीम राहत शिविरों में जमी है। जलस्तर में लगातार वृद्धि से कोनिया क्षेत्र के कई गांव के आसपास गंगा की बाढ़ का पानी पहुंच गया है। कोनिया के किसानों की लगभग एक हजार बीघे फसल बाढ़ के पानी में डूब कर नष्ट होती जा रही है। किसानों के खेतों में बाजरा, अरहर, उड़द और पशुओं के चारे की लहराती फसल सड़ती जा रही है। गंगा कटान अनवरत जारी है, जिससे किसानों की बर्बादी थमने का नाम नहीं ले रही है। इसी तरह कलिक मवैया के विश्वकर्मा बस्ती में गंगा बाढ़ का पानी राजेश विश्वकर्मा, पंडित विश्वकर्मा, देवी प्रसाद विश्वकर्मा के रिहायसी मड़हे में घुस गया है। जिससे परिवार समान आदि समेट कर सुरक्षित स्थान पर चले गए। पूर्व प्रधान बैजनाथ दुबे, समाजसेवी चंद बली चौबे, ललितेश चौबे ने बताया की गांव के किसानों की सौ बीघे से अधिक बाजरा, अरहर, उड़द की फसल डूब कर नष्ट हो रही है। जिला प्रशासन से पीड़ित परिवारों के लिए मदद की गुहार लगाई है। कलिक मवैया की सितारा देवी, राजेश विश्वकर्मा ने बताया कि उनके रिहायशी मड़हे शनिवार रात बाढ़ का पानी आ गया, जिससे सामान के साथ सुरक्षित स्थान पर चले गए। इसी तरह इटहरा ग्राम सभा में निर्माणाधीन पंचायत भवन के पास गंगा बाढ़ का पानी पहुंच गया है, जबकि धनतुलसी रोड से गंगेश्वर नाथ धाम जाने वाली सड़क पर लगभग पांच फुट पानी भर गया है। रविवार को शाम चार बजे रामपुर घाट की मांझी बस्ती में पानी आने से प्रशासनिक अफसरों की टीम ने 75 महिलाओं और बच्चों को अमिलौर प्राथमिक विद्यालय के राहत शिविर में पहुंचाया। सभी को खाने-पीने के सामान और दवाएं आदि भी दी गई। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि रविवार शाम चार बजे तक जलस्तर 80.500 मीटर तक पहुंच गया है, जो खतरे के निशान से सिर्फ 70 सेमी बचा है। उन्होंने बताया कि 24 घंटे में करीब एक मीटर वृद्धि हुई। खतरे का निशान 81.200 मीटर है।
पानी से घिरा आशियाना, ढूंढा सुरक्षित ठिकाना
सीतामढ़ी। कोनिया के बसगोती मवैया गांव के समीप भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। गांव के महेश सिंह के रिहायशी मड़हे में बाढ़ का पानी घुस गया है। घर की महिलाएं साधना सिंह, शीला देवी, रीना देवी, अष्टभुजा देवी आदि ने बताया की उनके रिहायशी मड़हे में शनिवार रात को पानी घुस गया है, जिससे वे लोग सामान निकाल कर सुरक्षित स्थान पर चली गईं। इसी तरह गांव से गंगाजी और शंकर जी मंदिर जाने का रास्ता पानी से भर गया है, जिससे लोगों का आवागमन बंद हो गया है। गांव के शेर बहादुर सिंह और लाल जी मिश्रा के घर के सामने तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। गांव के जुलुम सिंह का रिहायशी दालान बाढ़ के पानी से चारों ओर से घिर गया है। गांव के शिवबल सिंह ने बताया कि गांव के पास बाढ़ का पानी पहुंच गया है, जिससे गांव में जहरीले जंतु घुस रहे हैं।