गंगा का जलस्तर घटने से सीतामढ़ी में दिखने लगी घाट की सीढ़ियां।
गंगा का जलस्तर लगातार घटने से बाढ़ प्रभावित इलाकों में धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने लगी है। तीन दिनों में जलस्तर करीब दो मीटर तक घट गया। इससे बाढ़ के पानी से प्रभावित गांव की स्थिति पूर्व के जैसे हो गई, हालांकि सड़कों की हालत खराब होने से आवागमन में लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जलस्तर घटने के बाद भी छेछुआ- भुर्रा गांव में कटान अब भी जारी है। इससे छेछुआ के किसानों की उपजाऊ जमीन गंगा में समा रही है। शनिवार को शाम छह बजे तक जलस्तर 79.280 तक पहुंच गया।
करीब दस दिनों तक रौद्र रूप दिखाने के बाद गंगा का जलस्तर बुधवार की देर रात से घटने लगा। बृहस्पतिवार को करीब 500 सेमी, शुक्रवार को 500 सेमी और शनिवार को करीब एक मीटर तक जलस्तर कम हो गया। इससे पानी से घिरे सीतामढ़ी के चकतुलसी, कला तुलसी, हरिरामपुर, बदरी, बेरासपुर समेत करीब 20 गांव से पानीअ हट गया है। सीतामढ़ी गंगा घाट की डूबी सीढ़ियां भी अब दिखने लगी है। खेतों में अब भी पानी भरा होने से फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। बाढ़ का पानी हटने से ग्रामीण इलाकों की सड़कें कीचड़युक्त हो गई हैं। साइकल और बाइक से चलना दूभर हो गया है। जलस्तर घटने के बाद भी छेछुआ और भुर्रा गांव में कटान जारी है, इससे किसानों की उपजाऊ भूमि गंगा में समाती जा रही है। बाढ़ के दौरान केवल छेछुआ और भुर्रा की 100 बीघे से अधिक जमीन गंगा में समा चुकी है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक शनिवार शाम छह बजे गंगा का जलस्तर 79.280 मीटर तक पहुंच गया है। पांच सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर घट रहा है। मालूम हो कि बुधवार शाम तक गंगा का जलस्तर 81.200 मीटर तक पहुुंच गया था, जिससे गंगा के तटवर्तीय 40 से अधिक गांव के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई थी। बाढ़ से हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो चुकी है।