बेमौसम हुई बारिश बंद होने के आठ दिन बाद भी नगरवासियों को जलजमाव मुक्ति नहीं मिली है। क्षतिग्रस्त नाली जानलेवा बन गया है। लोग कीचड़ और जलजमाव के बीच से आने जाने को मजबूर हैं। सड़क पर बनें गढढ़े और दुर्गंध से परेशान ग्रामीणों ने इसकी शिकायत दर्ज कराई है बावजूद इसके अधिकारी समस्या समाधान के लिए कदम नहीं उठा रहे। गोपीगंज नगर स्थित जिला पंचायत बालिका इंटर के सामने क्षतिग्रस्त नाला, कठौता से सटे झम्मनपुर गांव सबकुछ कह रहा है। मनोज यादव, संजय यादव, संदीप यादव, सुधीर यादव, चंदा यादव, रविंद्र यादव आदि ने बताया कि वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण काल में शासन-प्रशासन स्वच्छता अभियान को बढ़ावा देने के लिए अबतक लाखों रुपये का वारा-न्यारा कर लिया लेकिन न नगरीय क्षेत्र स्वच्छता से जुड़ सके हैं नाही ग्रामीण इलाके। बालिका इंटर कालेज के सामने का क्षतिग्रस्त नाला ठीक राजमार्ग के किनारे होने से चार माह पहले ओवरलोड ट्रक के चढ़ने से टूट गया था तब से अब तक न राजमार्ग प्राधिकरण उसे बनवाने की जहमत नहीं उठाई। नगर में साफ सफाई की जिम्मेदारी संभालने वाला पालिका प्रशासन मौन है। महामारी से बंद चलने वाले कालेज में भले ही छात्राएं पठन-पाठन के लिए न आती हो लेकिन शिक्षकों की उपस्थिति 50 फीसद तक बनी रहती है। नगर क्षेत्र होने के कारण लोगों का बड़े पैमाने पर पहुंचने का क्रम दिन-रात लगा रहता है। ठेला, पटरी दुकानों के साथ कोतवाली, बस स्टैंड, ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन समेत विभिन्न वार्डों तक आने-जाने वाले नांक पर रुमाल रखकर ही इधर से गुजर पाते हैं। दिन के समय वाहन चालक बचबचाकर नाला को आर-पार करते हैं रात में किसी अनहोनी का भय बना रहता है। यही स्थिति झम्मनपुर गांव तक पहुंचने वालों की है। कहने के लिए कठौता मार्ग राजमार्ग से जोड़कर उत्तरी छोर के दर्जनों बाजारों तक लोगों की राह आसान करता है। मार्ग किनारे नाली का निर्माण एक दशक बाद भी न होने से जलजमाव की समस्या जड़ जमा चुकी है। पैदल हो या वाहन सवार सभी घुटने भर गंदे पानी से होकर गांवों को पार करते हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि एक सप्ताह में उक्त समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो तो डीएम का घेराव करेंगे।