ज्ञानपुर। साइबर क्राइम के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। लापरवाही और जागरूकता की कमी के कारण लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। ठग अन्य प्रांतों में पढ़ाई कर रहे अभिभावकों को अपना निशाना बना रहे हैं। पुलिस अधिकारी का डीपी लगाकर वे अभिभावकों को व्हाट्सअप कॉल करते हैं और उनके बेटे को किसी मामले में फंसने की बात कह कर रुपये ऐंठ रहे हैं।
जिले के साइबर थाने के मुताबिक बीते डेढ माह में करीब 90 साइबर ठगी के सामने सामने आए हैं। जिसमें 20 से 25 मामले सोशल मीडिया से संबंधित होते हैं। वहीं करीब 60 से 70 मामले फाइनेंसियल ठगी से जुड़े होते हैं। लोगों में जागरूकता की कमी और लालच के कारण अक्सर लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। जिले में अब साइबर थाना भी खुल गया है, जो हर महीने लोगों को साइबर ठगी से बचने का उपाय बताते हैं, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण लगातार साइबर ठगी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। साइबर ठग हर दिन नए-नए तरीकों को इस्तेमाल कर लोगों को अपने जाल में फंसाने का कार्य कर रहे हैं। जिले में बीते डेढ़ महीने में आए मामलों में साइबर टीम ने सोशल मीडिया से आठ से नौ मामले और करीब 20 से 25 फाइनेंसियल मामले का निपटारा जरूर कर दिया है, लेकिन लगातार बढ़ रहे मामले पुलिस के लिए भी चुनौती बनते जा रहे हैं। साइबर ठग शहर के कई प्रतिष्ठित परिवारों को व्हाट्सअप पर पुलिस की डीपी लगाकर निशाना बनाने का प्रयास किया, लेकिन सावधानी और सतर्कता से वे बच गए। ठग गैर जिले में रहकर पढ़ाई करने वाले युवकों के अभिभावकों को फोन कर उनके बेटे या परिवार के सदस्यों को फंसने की बात कही और रुपये ऐंठने का प्रयास किया।
ज्ञानपुर निवासी डॉ. अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि उनका बेटा बनारस में कोचिंग करता है। कुछ दिन पहले उनके व्हाट्सअप पर एक पुलिस वाले की फोटो लगी कॉल आई। उन्होंने फोन उठाया तो उधर से उसने पूछा कि आपका बेटा बाहर रहता है क्या। इन्होंने हां में जवाब दिया। जिसके बाद उसने बताया कि वह कॉलेज के बाहर एक कमरे से पकड़ा गया है और डॉ. अनिल से 60 रुपये की डिमांड की, लेकिन कॉलेज का नाम लेने पर ये अलर्ट हो गए और बेटे को फोन मिलाया तो वह रूम पर ही पढ़ाई कर रहा था। इससे वे ठगी से बच गए। इसी तरह भदोही के एक व्यापारी को भी फोन कर ठगों ने निशाना बनाने का प्रयास किया।