दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद रात आठ बजे के बाद चांद का दीदार कर सुहागिन महिलाओं ने करवा चौथ के व्रत का पारण किया। इस दौरान विघ्न विनायक श्री गणेश की आराधना की गई।
महिलाओं ने कहानियां कहीं और मंगल गाए। करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की सलामती और सुख-सौभाग्य की कामना को लेकर पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं।
व्रत को लेकर शुक्रवार को जिले में उत्साहपूर्ण माहौल रहा। महिलाओं ने बाजार में व्रत से जुड़े सामान की खरीदारी करने के बाद पूरे दिन कठिन व्रत रखा। इस दौरान पूजा-अर्चना की गई।
रात आठ बजे के बाद चांद का दीदार हुआ। व्रती सुहागिनों ने चलनी में चांद के साथ पति का चेहरा देखकर अखंड सौभाग्य की कामना की। पतियों ने उन्हें पानी पिलाकर व्रत तुड़वाया।
व्रत पारण के लिए तमाम घरों की महिलाओं के छत पर पहुंचने के चलते कॉलोनियों के मकानों के छत देर रात तक गुलजार रहे। त्योहार को लेकर घर-घर पकवान बनाए गए।