सीतामढ़ी। गंगा के बढ़ते जलस्तर और कोनिया क्षेत्र में शुरू हुई कटान का जायजा लेने के लिए बुधवार को आला अधिकारियों का अमला छेछुआ पहुंचा। जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद के साथ एसडीएम और पुलिस के आला अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंच कर बाढ़ की स्थिति देखी। इस दौरान जिलाधिकारी ने कटान से बचाव के लिए वन विभाग को किनारे पर पौधरोपण कराने का निर्देश दिया। साथ ही ग्रामीणों को बांस लगाने का सुझाव भी दिया।
तीन ओर गंगा से घिरे कोनिया क्षेत्र के कटान प्रभावित छेछुआ गांव में बुधवार को जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद, उपजिलाधिकारी ज्ञानपुर, अपर पुलिस अधीक्षक आदि ने छेछुआ गंगा के किनारे जा कर कटान प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया। अधिकारियों ने गंगा कटान से बर्बाद हो रहे किसानों की समस्याएं सुनी। किसानों ने अपने दु:ख दर्द को जिलाधिकारी को सुनाते हुए बताया कि हर वर्ष गांव का रकबा कम होता जा रहा है। उनकी कृषि की बहुमूल्य जमीनें हर वर्ष गंगा की कुपित धाराएं लील जा रही हैं। हरिहरपुर समेत गांव की दो बस्तियां वर्षों पूर्व गंगा में समा चुकी हैं। एक दलित बस्ती भी गंगा की धारा में समा चुकी है। किसानों ने कहा कि अगर कटान रोकने के लिए ठोस उपाय नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में छेछुआ गांव का अस्तित्व भी मिट सकता है। इस बारे में जिलाधिकारी ने किसानों को आश्वासन दिया और कहा कि कटान रोकने का प्रोजेक्ट बड़ा है। इसके लिए शासन को लिखा जाएगा। उन्होंने गंगा कटान रोकने के लिए बंधी प्रखंड से किसानों के खेतों में बंधी बनाने और वन विभाग से पौधरोपण कराने का निर्देश दिया। साथ ही किसानों को सलाह दी कि वह कटान रोकने के लिए गंगा के किनारे अपने खेतों में बांस लगाएं।
सीतामढ़ी। जिलाधिकारी के गांव दौरे के बाद छेछुआ के ग्रामीणों ने गंगा कटान रोकने के लिए कारगर उपाय करने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। किसानों का कहना था कि छह दशक से किसान बर्बाद हो रहे हैं। शासन और प्रशासन की ओर से सिर्फ आश्वासन मिलता है, लेकिन कटान रोकने के लिए आज तक कोई कारगर उपाय नहीं किया गया। इसके कारण छेछुआ और भुर्रा के किसान बर्बाद होते जा रहे हैं। किसानों ने कहा कि सरकार बदली, निजाम बदला, लेकिन उनकी समस्याएं और बर्बादी जस की तस है। गंगा में बाढ़ आते ही कोरम पूरा करने के लिए जिले के उच्च अधिकारी किसानों के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए गांव में आते हैं लेकिन आज तक कुछ भी नही हुआ। किसानों के हित के लिए किसी ने भी कोई भी कार्य नहीं किया। किसानों ने आरोप लगाया कि गंगा में बाढ़ आते ही तमाम राजनीतिक पार्टियों के नेता राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए गांव में आते हैं लेकिन किसानों की मदद के नाम पर किसी ने कुछ भी नहीं किया। प्रदर्शन करने वालों में जामवंत सिंह, दशरथ सिंह, नागेंद्र सिंह, राम सिंह, रणधीर सिंह, संतोष सिंह, शिवशंकर यादव, देवराज यादव, मुकेश यादव, शोभई, मुन्नू, सूर्यमणि यादव शीतला सिंह, राजन सिंह, महेंद्र यादव, संतोष, पंकज, मस्तराम, बऊ सिंह आदि रहे।
निबटने के लिए प्रशासनिक स्तर से तैयारियां तेजी से शुरू हो गई हैं। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने एक प्लाटून पीएसी (जल पुलिस) को रामनगर वाराणसी से बुलाया है। पीएसी के जवान सीतामढ़ी डाक बंगले में कैंप किए हुए हैं। दूसरी ओर गंगा के जलस्तर में स्थिरता आ गई है। इससे किसानों को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि बाहर से गंगा में छोड़े जा रहे पानी का असर पड़ेगा तो जलस्तर बढ़ सकता है।
सीतामढ़ी। बाढ़ क्षेत्र के लोगों का हाल जानने के लिए बुधवार को ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्र ने धनतुलसी, कलिक मवैया, छेछुआ आदि गांवों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों से बातचीत की और सतर्क रहने को ताकीद किया। कहा अभी ज्यादा परेशानी नहीं है, लेकिन दूसरे प्रदेशों से गंगा में छोड़ा जा रही पानी आएगा तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि तटवर्ती गांवों के लोगों को दिक्कत आएगी तो उनके भोजन और निवास स्थान की व्यवस्था मेरे स्तर से की जाएगी।