जिले की पांच सहकारी समितियों का 49.88 लाख रुपये से जीर्णोद्धार किया जाएगा। सहकारिता विभाग ने इस्टीमेट बनाकर शासन को भेज दिया है। स्वीकृति मिलने पर काम शुरू होगा। इससे समितियों को कंप्यूटरीकृत करने के साथ ही अन्य सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
जिले में कुल 52 समितियां हैं। इसमें से 43 से 44 समितियां सक्रिय हैं। यहां से किसानों को उर्वरक, ऋण आदि सुविधाएं मिलती है। केंद्र में सहकारिता मंत्रालय बनने के बाद सरकार ने इसका नाम बदलकर बी पैक्स कर दिया है। हर समितियों पर 250-250 सदस्य भी बनाए जा चुके हैं। जिले की अधिकतर समितियां ढाई से तीन दशक पूर्व बनाई गई हैं।
निगरानी न होने से पूर्व में बनी अधिकतर समितियां जर्जर हो चुकी हैं। इससे खाद-बीज वितरण के समय काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित समितियों के जीर्णोद्धार के साथ ही केंद्र सरकार की केंद्र पुरोनिधानिक योजना के तहत कंप्यूटरीकरण करने का काम शुरू कर दिया है। ऐसे में जर्जर समितियों पर आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराना मुश्किल हो रहा है।
अब सहकारिता विभाग ने पांच समितियों के जीर्णेाद्धार के लिए शासन को पत्र लिखा है। एक-एक समिति पर 9.96 लाख से 10 लाख तक का खर्च आएगा। पांचों समितियों पर कुल 49.88 लाख रुपये खर्च होंगे। एआर सहाकारिता राम प्रकाश ने बताया कि पांच समितियों के जीर्णेाद्धार के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
स्वीकृति मिलने पर काम शुरू कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि भविष्य में समितियों पर लोगों को उर्वरक, ऋण के साथ-साथ सीएचसी, दवा आदि की सुविधाएं मिल सकेंगी।