ज्ञानपुर नगर में जाती स्कूली वाहन। संवाद
ज्ञानपुर। परिवहन विभाग की जांच में 42 स्कूली वाहनों का फिटनेस फेल मिला है। इसके बाद भी वे बच्चों को लादकर सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। दूसरी ओर परिवहन विभाग नोटिस और चालान की कार्रवाई तक सिमट कर रह गया है। शासन-प्रशासन की सख्ती का असर स्कूल संचालकों पर नहीं दिख रहा है। स्कूल वाहन के नाम पर अप्रशिक्षित हाथों में स्टेयरिंग है और सड़कों पर डग्गामार स्कूल वाहनों की भरमार। जिले में कुल 725 निजी और कॉन्वेंट विद्यालय संचालित होते हैं। इनमें 50 विद्यालयों के पास खुद के निजी बस और चारपहिया वाहन हैं, जिनसे विद्यालय के बच्चों को ढोया जाता है। इसके लिए स्कूल प्रबंधन अभिभावकों से मोटी रकम वसूलता है। बच्चों को ढोने वाले वाहनों की बेहतर मॉनीटरिंग नहीं की जाती। यही वजह है कि ये वाहन फिटनेस की मियाद खत्म होने के बाद भी सड़कों पर बेरोकटोक चल रहे हैं। परिवहन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में कुल 495 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। इनमें से 42 का फिटनेस फेल हो चुका है। विभाग का दावा है कि सभी को नोटिस भेजा गया है। इनमें आठ वाहनों का चालान भी किया गया है लेकिन इसके बाद भी ज्ञानपुर, भदोही, गोपीगंज समेत अन्य क्षेत्रों में ये वाहन बिना फिटनेस के ही सड़कों पर धड़ल्ले से दौड़ते देखे जा सकते हैं। ऐसे में बच्चोंं की जान सांसत मेंरहती है। लापरवाही का आलम यह है कि कई स्कूली वाहनों में कंडक्टर भी नहीं होते हैं। ऐसे में वाहन में चढ़ते और उतरते वक्त बच्चों की जान खतरे में रहती है। एक सप्ताह पूर्व मोढ़ क्षेत्र के चकभवानी गांव में एक स्कूली वाहन खेत में पलट गया था, जिसमें एक बच्चा घायल हो गया। जांच में उसकी फिटनेस वर्ष 2020 से ही फेल मिली। प्राइवेट विद्यालयों में बच्चों को ढोने के लिए नियम और कानून बने हैं। निर्धारित पीले रंग की बसों और उस पर लाल रंग की पट्टी व बीच में गोल निशान में स्कूल वाहन और ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए। इसके अलावा अन्य किसी चार पहिया वाहन से बच्चों को लाने-ले जाने की अनुमति नहीं दी जाती। कई स्कूलों में ऑटो रिक्शा, ई-रिक्शा और टैक्सी जैसे वाहनों से बच्चों को ढोया जा रहा है। इनमें सुरक्षा मानक का कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। साथ ही अप्रशिक्षित हाथों में वाहनों की स्टेयरिंग थमा दी जा रही है।