ज्ञानपुर। जिले में नकली पशु खाद्य टॉनिक का कारोबार धड़ल्ले से हो रहा है। गांवों में कमीशन पर पशुपालकों को टॉनिक के नाम पर नकली पदार्थ बांटा जा रहा है। इस पर न पशुपालन विभाग सख्त है, न ड्रग और ना ही खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग। तीनों विभागों के मौन साध लेने का लाभ व्यापार में लगे थोक दुकानदार, सेल्समैन उठा रहे हैं।
डीघ ब्लॉक क्षेत्र के दरवांसी, बसहीं, रजमला, चंदापुर, मैलौना, गोधना, सुधवैं, ऊंज, कुरमैचा, नवधन, नथईपुर, सेमराध, कोइरौना, दवनपुर, जंगलपुर, कुलमनपुर आदि गांवों में बाइक, साइकिल पर टॉनिक लादकर सेल्समैन मोलभाव करते आसानी से नजर आते हैं। पशुपालक राजकुमार सिंह, वैभव कुमार, मनीष, त्रिभुवन, पंकज आदि ने बताया कि सेल्समैन ऐसी प्रमुख कंपनियों का नाम बताकर छह लीटर का खाद्य टॉनिक तीन सौ रुपये में देने का ऑफर करते हैं।
बताते हैं कि वही ब्रांड मेडिकल स्टोरों पर पांच सौ से सात सौ रुपये तक में बिकता है। सस्ता के चक्कर में कुछ लोग खरीदारी भी कर लिए हैं। गत वर्ष इसी सीजन में टॉनिक लेकर रखे मुनीब, मनोज कुमार, विशाल, अमरजीत ने बताया कि 10 दिन बाद टॉनिक पानी की तरह हो गया। एक माह तक चलने वाले टॉनिक की खुराक पशुओं को सही ढंग से नहीं दी जा सकी। कमलेश कुमार नाम के एक सेल्समैन ने बताया कि हम लोग हंडिया-प्रयागराज से माल उठाकर कमीशन पर बेचते हैं जबकि थोक दुकानदार कोई और है।
सीवीओ डॉ. जेडी सिंह ने कहा कि शिकायत पर सख्ती की जाती है, लेकिन इसके लिए लाइसेंस की जिम्मेदारी ड्रग प्रशासन की है। इसलिए पशुपालन विभाग थोकदारों पर प्रभावी कदम नहीं उठा पाता। ड्रग इंस्पेक्टर एके बंसल ने कहा कि मामला खाद्य सुरक्षा विभाग से जुड़ा है और इसकी जिम्मेदारी उन्हीं की है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी केएन त्रिपाठी ने कहा कि टॉनिक मिलावटी है या नकली, इसकी जांच कराई जाएगी।