आजादी आंदोलन काल में क्रांतिकारियों का केंद्र रहा परसीपुर रेलवे स्टेशन बदहाली के दौर से गुजर रहा है। स्टेशन पर समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। जिससे यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं नही मिल पा रही हैं। जिम्मेदारों के ध्यान न देने से यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
वाराणसी-जंघई रेलखंड पर भदोही के बाद परसीपुर रेलवे स्टेशन आता है। यहां पर कुछ महीने पूर्व आरक्षण केंद्र खोल दिया गया। इससे यात्रियों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है, हालांकि मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। पानी, बिजली शौचालय, सफाई, बैठने के लिए बेंच तक सही नहीं है। आधुनिकीकरण के तहत भदोही, ज्ञानपुर रोड स्टेशन पर जहां पेयजल की बेहतर व्यवस्थाएं है। वहीं यहां दोनों प्लेटफार्म पर लगे हैंडपंप एक-एक साल से खराब है। प्लेटफार्म पर 24 लाइट लगी है। प्लेटफार्म एक की लाइट बंद है, जिससे रात में यात्रियों को दिक्कत होती है। सन 1900 में मुंबई महाधिवेशन के दौरान जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने करो या मरो का नारा दिया तो समूचा देश जल उठा। उस दौरान वेदमनपुर निवासी स्वतंत्रता सेनानी पंडित श्रीराम दुबे ने अपने साथियो संग स्टेशन को आग के हवाले कर दिया था। अपनी आंचल में इतिहास समेटा स्टेशन बदहाली का शिकार है। व्यापारी सुरेंद्र मिश्रा, तारक नाथ गुप्ता, प्रेमचंद मोदनवाल, आशीष दुबे, अनिल चौरसिया ने कहा कि ऐतिहासिक स्टेशन पर सुविधाओं की कमी होना विभाग की लापरवाही को दर्शाता है। स्वतंत्रता सेनानियों के केंद्र बिंदु रहे स्टेशन की समस्याओं पर विभाग को गंभीरता दिखानी चाहिए।