नगर के एक प्रतिष्ठान में सजे हैंडीक्राफ्ट्स उत्पाद। स्रोत-संवाद
- फोटो : दूषित मट्ठा पीने के बाद जिला अस्पताल में भर्ती बच्चे।
भदोही। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) की बढ़ी सदस्यता शुल्क फिलहाल कम होने के आसार नहीं हैं। बीते दिनों सीईपीसी बोर्ड की बैठक में शुल्क कम करने पर सहमति तो बन गई थी, लेकिन यह तभी संभव होगा, जब वार्षिक साधारण सभा (एजीएम) में यह पारित हो जाए। अभी एजीएम होने में काफी समय है। सीईपीसी ने जनवरी 2025 के एजीएम में सदस्यता शुल्क में करीब 300 फीसदी की बढ़ोत्तरी कर दी थी। जिसे जून 2025 से लागू किया जा चुका है। पहले सदस्यता शुल्क के चार अलग-अलग कैटेगरी निर्धारित थे।
इसमें सलाना 50 लाख तक का कारोबार करने वाले निर्यातकों के लिए दो हजार, 50 लाख से एक करोड़ तक तीन हजार, एक करोड़ से 10 करोड़ तक के कारोबारियों को पांच हजार तथा 10 करोड़ से अधिक सलाना व्यवसाय करने वाले निर्यातकों को 10 हजार रुपये शुल्क देना होता था।
बीते साल जून से दरों में लगभग 300 प्रतिशत बढ़ोत्तरी करते हुए सभी निर्यातकों के एक स्लैब बनाकर शुल्क छह हजार रुपये कर दिया गया।
बीते दिनों आम निर्यातकों की ओर से शुल्क बढ़ोत्तरी पर सवाल उठाए जाने पर सीईपीसी प्रशासनिक सदस्य संजय गुप्ता ने बोर्ड की बैठक में दरों की समीक्षा किए जाने की मांग की थी।
इसमें दरों पर पुनर्विचार करने पर सहमती तो बन गई थी और कहा गया था कि इसे आगामी एजीएम में रखा जाएगा, लेकिन एजीएम में अभी महीनों का समय है और जब तक एजीएम की बैठक नहीं होती तब तक दरों पर पुनर्विचार संभव नहीं है।