मखमली कालीन के लिए विश्व प्रसिद्ध कालीन नगरी में महिलाएं महफूज नहीं हैं। पिछले कुछ महीनों की घटनाओं पर नजर डालें तो औसतन हर दूसरे दिन जहां एक महिला का उत्पीड़न हुआ, वहीं पांचवें दिन उनकी आबरू के साथ खिलवाड़ किया गया। सरकारी आंकड़ों में पांच माह में 80 महिलाएं उत्पीड़न का शिकार हुईं। हालांकि ऑफ दी रिकार्ड यह आंकड़ा और भी ज्यादा है। क्योंकि तमाम मामले सुलह-समझौते और थानों से ही लौट जाते हैं।
महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों का निस्तारण करने में भी खाकी पीछे है। 10 फीसदी मामलों में भी अब तक फाइनल रिपोर्ट पुलिस नहीं लगा सकी है। महिलाओं पर बढ़ते अपराध को रोकने के लिए सरकार भले ही तमाम कानून बनाने के साथ ही सुविधाएं दे, लेकिन पुलिस के लचर रवैये से महिलाओं पर अपराध के मामले थम नहीं रहे हैं। घरेलू हिंसा से लेकर बलात्कार, अपहरण, छेड़खानी जैसी घटनाओं से हर दूसरे दिन एक महिला पर आफत आ जाती है। राज्य महिला आयोग के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो जनवरी 2016 से मई 2016 तक महिला उत्पीड़न और अस्मत से खिलवाड़ के करीब 80 मामले विभिन्न थानों में दर्ज किए गए। इसमें हत्या के तीन, दहेज हत्या के छह, महिला उत्पीड़न के 17, बलात्कार के 10, अपहरण के 17, शीलभंग के 15 और छेड़खानी के 15 के मामले शामिल हैं। यह मामले थानों में पंजीकृत हैं, जबकि लोकलाज के भय से ज्यादातर महिलाएं थानों तक पहुंच ही नहीं पातीं। कुछ मामलों में पुलिस किरकिरी होने के डर से हस्तक्षेप कर सुलह-समझौता करा देती है। पंजीकृत न होने वाले मामलों को देखा जाए तो हर रोज महिलाएं उत्पीड़न के अग्नि परीक्षा से गुजर रही हैं।
इनसेट
केस-1-चौरी थानाक्षेत्र के एक गांव की छात्रा के साथ चार माह पूर्व बलात्कार की घटना हुई थी। इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया, लेकिन आज तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। पीड़ित छात्रा और उसका परिवार दर-दर की ठोंकरे खाने को विवश है।
केस-2- औराई के घोसिया बाजार के एक वार्ड निवासी एक विवाहिता से जनवरी में दुष्कर्म की घटना हुई थी। काफी जद्दोजहद के बाद पुलिस ने मुकदमा तो दर्ज किया, लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है।
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महिलाओं के साथ होने वाले अपराध के मामलों में कोई कोताही नहीं बरती जाती है। शिकायत मिलने पर प्रथम दृष्टया मुकदमा दर्ज कराया जाता है। छानबीन के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया जाता है।
डॉ. अरविंद भूषण पांडेय, एसपी