सीतामढ़ी। पंचवटी धाम ओझापुर में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन बुधवार को आचार्य शरद कृष्ण जी महराज ने भगवान श्री कृष्ण की बाललीलाओं का मनोहारी वर्णन कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कहा कि भगवान श्रीकृष्ण जब पौगंड अवस्था में थे तब तक उन्होंने गृह लीलाएं कीं जब वे मात्र छ: दिन के ही थे तब चतुर्दशी के दिन पूतना आई, जब भगवान तीन माह के हुए तो करवट उत्सव मनाया जा रहा था तभी शकटासुर आया। भगवान ने उस राक्षस का उद्धार किया। इसी तरह बाल लीलाएं, माखन चोरी लीला, ऊखल बंधन लीला, यमलार्जुन का उद्धार आदि दिव्य लीलाएं की। महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला दिव्य है और हर लीला का आध्यात्मिक पक्ष है। श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व के अनेक पहलू हैं। वे मां के सामने रूठने की लीलाएं करने वाले बालकृष्ण हैं तो अर्जुन को गीता का ज्ञान देने वाले योगेश्वर कृष्ण। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बाल्यकाल में अनेकों लीलाएं की। कहा भगवान अपने भक्तों के हर भाव को पहचानते हैं। इंद्रियों पर नियंत्रण कर लेने से भगवान का सानिध्य प्राप्त होता है।