घोसिया। बारिश थमने के 22 दिन बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों के हालात सुधरने के नाम नहीं ले रहे हैं। कई पक्के मकानों के प्रथम तल अब भी जलमग्न होने से परिवार दूसरे व तीसरे तल को सुरक्षित ठिकाना बनाने में प्रतिदिन मेहनत करते देखे जाना रोजमर्रा की बात है। वहीं कच्चे रिहायशी घरों के गिरने का सिलसिला जारी रहने से गरीब परिवार रहने के लिए इधर-उधर भटक कर कहीं पड़ोसी तो कहीं स्कूलों में शरण लेकर समय बीता रहे हैं। बावजूद इसके औराई तहसील प्रशासन मूक-बधिर होकर न पानी निकलवाने को कदम बढ़ा रही है और बेघर हो रहे लोगों को चिह्नित कर आवास आदि सुविधाएं दिला पा रहा है। बृहस्पतिवार को तहसील के विशुनपुर में विजय शंकर शुक्ला, शिवपूजन शुक्ला, वंशनारायण शुक्ला के घर देखते ही देखते गिर गए। तो तहसील को जोड़ने वाले मार्ग किनारे और सीएचसी तक पक्के मकान पानी की जद में आकर गिरने की स्थिति में हैं। घोसिया, माधोसिंह, भवानीपुर, जयरामपुर, नरथुआं, उपरौठ, औरंगाबाद, लक्ष्मणिया, भमौरा, पियरोपुर आदि गांवों में जलजमाव के कारण हैंडपंपों से कीचड़युक्त दूषित निकलने लगा है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि तहसील प्रशासन को जानकारी होने के बाद भी लापरवाही बरती जा रही है। जलजमाव व दूषित पानी पीने से लोग तरह-तरह की बीमारियों से ग्रसित होते जा रहे हैं लेकिन न दवा का ही छिड़काव कराया जा रहा है और न पानी निकालने की व्यवस्था कर हैंडपंपों का वाश ही करवाए जा रहे हैं। प्रभारी तहसीलदार आरके सिंह ने कहा कि प्रभावित गांवों का दौरा कर राजस्व कर्मी रिपोर्ट दे रहे हैं। शीघ्र ही दवा का छिड़काव, जलजमाव वाले क्षेत्रों में पानी निकलवाने का प्रयास जारी है।