इसमें समाज के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला गया।
मुख्य अतिथि डा. राम नवल चौबे ने आचरण में जीवन मूल्यों को अपनाने और समाज और राष्ट्रहित में त्याग और आत्म बलिदान भाव से आगे बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया। इसमें रामचंद्र तिवारी, आनंद स्वरूप श्रीवास्तव, राजेंद्र मिश्र, शंभूनाथ त्रिपाठी ने अपने विचार रखे।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना के साथ कवि सतीश तिवारी ने राष्ट्रवाद से ओत प्रोत रचना नश-नश में ज्वाला दमक रही जो आग लगाए पानी में प्रस्तुत कर जोश का संचार किया।
रचनाकार मुन्नू लाल अकेला ने आदर्शों के तत्व समाहित प्रकृति सुंदरी के कण-कण में रचना सुनाकर जीवन आदर्शों को आचरण में उतारने का संदेश दिया।
अधिवक्ता विंध्यवासिनी त्रिपाठी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गीत जागृत स्वाभिमान भारत का सुनाया और सराहना अर्जित की। इस मौके पर केआर गुप्त, शशि पांडेय, श्याम बिहारी तिवारी समेत कई लोग मौजूद रहे।