चककलूटी गांव में मनरेगा में काम करते प्रवासी।
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ज्ञानपुर। कोरोना वायरस और लॉकडाउन के कारण दूसरे शहरों से आए प्रवासियों को मनरेगा में रोजगार दिलाने के लिए प्रशासन ने कवायद तेज कर दी है। मजदूरों की जिदगी अब धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है, गांव में रौनक है। प्रशासन अब तक आठ हजार हाथों को काम दे दिया है जबकि चार हजार को जल्द रोजगार मिल जाएगा।
यूं तो जिले में एक लाख 51 हजार मनरेगा मजदूर है। लेकिन इसमें 50 हजार श्रमिक सक्रिय हैं। कोरोना वायरस के कारण मुंबई, दिल्ली, सूरत समेत अन्य दूसरे शहरों से घर लौट रहे श्रमिकों को रोजगार दिलाने के लिए शासन ने मनरेगा के लिए अतिरिक्त बजट आवंटित किया है। माह भर के अंदर प्रशासन ने जिले में आए आठ हजार प्रवासियों को रोजगार दिला दिया है। गावों में प्रवासी तालाब समेत अन्य जरूरी काम में सुबह-शाम पसीना बहा रहे हैं। प्रवासी मजदूर सोशल डिस्टेंसिग का पालन करते हुए कार्य कर रहे हैं। ज्ञानपुर के चककलूटी गांव में 125 प्रवासी मजदूरों को काम मिला तो वह खुश हो गए। कहा कि आर्थिक संकट से अब उन्हें नहीं जूझना पड़ेगा और परिवार की रोजी रोटी चलती रहेगी।
चककलूटी गांव में मंगलवार को ग्राम प्रधान इसरावती देवी, प्रतिनिधि मेवालाल यादव और रोजगार सेवक रामधनी यादव ने प्रवासी श्रमिकों को नाश्ता और पानी की व्यवस्था की। जिला समन्वयक मनरेगा राजाराम ने कहा कि 561 ग्राम पंचायतों में अब तक 511 में मनरेगा का काम चल रहा है। 20 से अधिक हॉटस्पाट गांव इसमें शामिल नहीं है। सात हजार नए जाबकार्ड बने जबकि पांच हजार प्रवासियों को उनके परिवार के कार्ड से जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि कुल 18 से 20 हजार प्रवासियों को काम दिलाया जाएगा। मनरेगा में काम के दौरान सभी को मॉस्क लगाने और फिजिकल डिस्टेंसिग के पालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।