ज्ञानपुर। शासन-प्रशासन की तमाम सख्ती बेअसर साबित हो रही है। गोशालाओं में गायों की दुर्दशा कम नहीं हो रही। ठंड से बचाव एवं खानपान की व्यवस्था न होने से आए दिन मवेशी काल कवलित हो रहे हैं। डुड़वा धरमपुरी स्थित अस्थायी गोशाला में आठ मवेशियों की मौत हो गई। इसको लेकर पशुपालन विभाग और प्रशासन में खलबली मच गई है।
गायों के संरक्षण के लिए पिपरिस में एक स्थायी और 15 से अधिक अस्थायी गोशालाएं बनाई गईं हैं। इसमें दो हजार से अधिक मवेशी रहते हैं। मवेशियों के हिसाब से शासन से बजट आवंटित होता है। गो-संरक्षण को लेकर शासन से लेकर प्रशासन संजीदा है। महीने भर पूर्व पिपरिस की स्थायी गोशाला में मवेशियों की मौत हो गई थी और पूरे रजा में कई मवेशी ठंड से मर गए थे। प्रशासन के सख्त निर्देश के बाद भी गोशालाओं में व्यवस्थाएं सुधर नहीं रही हैं। बुधवार को डुड़वा धरमपुरी की अस्थायी गोशाला में आठ गायों की मौत का मामला सामने आया। वह कैसे मरीं, यह स्पष्ट नहीं हो सका। गायों के शवों को दफनाने के दौरान इसका पता चला। ग्रामीण गोपाल ने बताया कि प्रतिदिन चार से पांच गायों की मौत होती है। पोस्टमार्टम कराने के बजाए गड्ढा खोदकर दफना दिया जाता है। ग्रामीण जय नारायण, मेवालाल, विनोद, राम सनेही यादव ने जिला प्रशासन से गायों के संरक्षण की व्यवस्था बेहतर करने की मांग की। सीडीओ विवेक कुमार त्रिपाठी ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं है। बीडीओ से बात कर मामले की जानकारी ली जाएगी। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जेडी सिंह ने कहा कि ग्रामीणों से सूचना मिली है। मौके पर जाकर देखेंगे। लापरवाही मिलेगी तो कार्रवाई की जाएगी।
उधर इस संबंध में गोशाला संचालन करने वाली संस्था के संरक्षक भोलानाथ शुक्ला ने कहा कि गायें बीमार थीं और उनकी मौत एक दिन में नहीं बल्कि सप्ताह भर में हुई है। शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद उनके शवों को दफनाया गया। कुछ लोग जान बूझकर साजिश के तहत मामले को उछाल रहे हैं।