ज्ञानपुर। परिषदीय विद्यालयों में यूनिफॉर्म वितरण में झोल की बू आने लगी है। ड्रेस बांटने वाली फर्मों से लेकर विभागीय कर्मचारियों की कार्यप्रणाली संदेहास्पद होने के बाद जांच एवं खींचतान के बीच बच्चे छह महीने से फटे-पुराने यूनिफॉर्म के स्कूल जा रहे हैं। यूनिफॉर्म को महिला समूहों से सिलवाकर देने का जिलाधिकारी का आदेश भी हवा-हवाई हो गया है। अब तक एक भी महिला समूह को सिलाई के ऑर्डर नहीं मिले हैं। आलम यह है कि ड्रेस न पहुंचने से नोडल अफसर स्कूलों से लौट जा रहे हैं।
प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों को नि:शुल्क यूनिफॉर्म देने की योजना के क्रियान्वयन में उदासीनता बरती जा रही है। शिक्षण सत्र का आधा समय व्यतीत हो चुका है, लेकिन परिषदीय विद्यालयों में पंजीकृत 1.43 लाख बच्चों में से 60 फीसदी से अधिक बच्चों के शरीर पर अभी नया परिधान नहीं सज सका है। प्रति बच्चे 600 के हिसाब से करीब छह से सात करोड़ रुपये यूनिफॉर्म के लिए बजट स्वीकृत हुआ था। नवप्रवेशी कक्षा एक और छह के बच्चे अब भी बगैर यूनिफॉर्म के, जबकि अन्य बच्चे फटे-पुराने कपड़ों में ही स्कूल पहुंच रहे। नौनिहालों के साथ उनके अभिभावक आज भी यूनिफॉर्म वितरण का इंतजार कर रहे हैं। उधर जहां कहीं वितरण हुआ भी है तो वहां रेडीमेड यूनिफॉर्म बांट दिया गया। जुलाई में बजट आने के बाद जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने महिला समूहों को रोजगार सृजित करने के लिए सिलाई कराने का निर्देश दिया था, लेकिन वह भी ठंडे बस्ते में चला गया। भदोही जिले के दो ब्लॉकों को छोड़ दिया जाए तो चार ब्लॉकों के एक लाख से अधिक बच्चों को अब तक यूनिफॉर्म नहीं मिल सका।
शासन-प्रशासन भी जिम्मेदार
ज्ञानपुर। परिषदीय स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को समय पर यूनिफॉर्म न मिलने के पीछे कहीं न कहीं शासन-प्रशासन भी जिम्मेदार है। अप्रैल से शिक्षा सत्र शुरू हो गया, लेकिन यूनिफॉर्म का पैसा जुलाई में आया। एक महीने तक टेंडर, कोटेशन के साथ सैंपल की जांच में गुजर गए। इससे सितंबर से ड्रेस का वितरण शुरू हुआ। चयनित फर्में भी दौड़-धूप के बाद हर जगह ड्रेस नहीं पहुंचा सकीं। न चयनित होने वाली कुछ फर्मों के संचालकों ने आरोप लगाया कि केवल दो फर्मों को ही जिम्मेदारी मिली है, जबकि टेंडर वाले स्कूलों में कम से कम तीन फर्मों की जरूरत होगी। शिकायत पर मंडलायुक्त ने भी विशेष जांच दल गठित कर दिया है।
आईआईसीटी में भेजे गए सैंपल में जिन फर्मों को हरी झंडी मिली, उन्हें शामिल किया गया। महिला समूहों से सिलाई के लिए निर्देश दिया गया था। समूहों की संख्या कम होने के कारण वितरण व्यवस्था बिगड़ जाती। जांच प्रक्रिया के चलते देर हुई है। पखवारे भर के अंदर ड्रेस वितरण करा दिया जाएगा।
अमित कुमार, बीएसए