प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन के सपने को बालू की कमी से ग्रहण लग गया है। जिले के 561 गांवों में बनने वाले एक लाख 34 हजार शौचालयों का निर्माण रुक गया है। ऐसे में दिसंबर तक जिले को ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) बना पाना मुश्किल लग रहा है। शासन और प्रशासन की ओर से जल्द इस पर निर्णय नहीं लिया गया तो सरकार की मंशा पर पानी फिर सकता है।
खुले में शौच जाने से फैल रही बीमारियों और बहन-बेटियों को खुले में शौच न जाना पड़े जिसके लिए 2014 में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत व्यापक स्तर पर शौचालय निर्माण की पहल की। ग्रामीण अंचलों से लेकर नगरीय इलाकों में तेजी से शौचालय बनने शुरू हुए। इसमें एक-एक गांव को चिह्नित कर उन्हें खुले में शौच से मुक्त करने की कवायद शुरू की गई। गंगा से सटे 46 गावों को प्राथमिकता के आधार पर ओडीएफ बनाने के साथ ही जिले को दिसंबर तक खुले में शौच मुक्त बनाने की गाइडलाइन शासन से जारी की गई।
इसके लिए एक लाख 34 हजार शौचालय बनने शुरू हुए लेकिन कुछ ही दिनों में खनन पर रोक लगने से बालू की निकासी पूरी तरह ठप हो गई। निकासी ठप होने के बाद शौचालय निर्माण की रफ्तार थम गई। विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 80 फीसदी शौचालय निर्माण बालू के अभाव में रुक गए हैं। इस पर जल्द ही कोई वैकल्पिक निर्णय नहीं लिया गया तो निर्धारित समय तक शौचालय को पूर्ण कर पाना मुश्किल होगा।
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बालू न मिलने से गावों में शौचालय और आवास का निर्माण रूक गया है। जिससे गावों में प्रधानों की किरकिरी हो रही है। शासन और प्रशासन की ओर से इस पर कोई ठोस निर्णय लेने की जरूरत है। जिससे विकास के कार्य तेजी से हो सके।
राजेंद्र मिश्र शंकराचारी
अध्यक्ष, प्रधान संघ
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खनन पर रोक लगने के साथ ही मानसून आने से बालू की दिक्कत हो रही है, जिससे तेजी से शौचालय का निर्माण नहीं हो पा रहा है। शासन भी इससे अवगत है। प्रशासनिक स्तर से जो भी जरूरी प्रयास होना होगा उसे किया जा रहा है।
विशाख जी, डीएम भदोही