वस्तु एवं सेवा शुल्क (जीएसटी) के प्रावधानों और नियमों से कालीन उद्यमी और व्यापारी अनभिज्ञ हैं। हालांकि जीएसटी में कागजी काम बंद हो जाने और कामकाज में पारदर्शिता आने को लोग भारी राहत के रूप में देख रहे हैं। इस बावत उप्र निर्यात संवर्धन परिषद के उपाध्यक्ष विनय कपूर मानते हैं जीएसटी से व्यवसाईयों का समय बचेगा। हालांकि अलग अलग उत्पादों पर जीएसटी की दरें क्यां होगी इसका अभी इंतजार करना होगा। उम्मीद जताई कि इससे व्यापारियों के दोहन पर लगाम लगेगा।
कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के द्वितीय उपाध्यक्ष हाजी अब्दुल रब अंसारी ने कहा कि जीएसटी के बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। क्योंकि इसके लागू होने के बाद इस पर कार्यशालाएं और संगोष्ठी के माध्यम से लोगों को जागरुक करना होगा। जब आम आदमी के मन में भ्रांतियां खत्म हो जाएंगी तो जरूर इसके गुण-दोष पर चर्चा हो सकेगी। प्रमुख कालीन निर्यातक हाजी अब्दुल सत्तार अंसारी ने कहा कि सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लागू होने के बाद व्यापारियों या आम आदमी को केवल एक टैक्स देना होगा। बाकी सभी टैक्स खत्म हो जाएंगे। जीएसटी के जो प्रावधान पिछले कुछ दिनों में पढ़ने को मिले हैं उससे तो आम व्यापारी को राहत होगी। लेकिन इसके लागू होने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। एकमा के मानद सचिव, पियूष बरनवाल का मानना है कि जीएसटी में भुगतान की प्रक्रिया आसान होने के साथ साथ कागजी कार्रवाई पर विराम लग जाएगा। यह भारी राहत वाली बात है। वैट जैसे अन्य कई प्रकार के कर भी खत्म हो जाएंगे लेकिन उनके स्थान पर क्या टैक्स देना होगा इसकी जानकारी के बाद ही बहुत कुछ कहा जा सकेगा।