अमर उजाला ब्यूरो
ज्ञानपुर। हरि प्रबोधनी एकादशी पर बृहस्पतिवार को भगवान विष्णु की पूजा अर्चना कर मंगलकामना की गई। इस दौरान किसानों ने ईख की पूजा की तो महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर शाम को आरती कर पूूजा अर्चन की। एकादशी पर गंगा घाटों पर भी श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई।
एकादशी पर धार्मिक स्थली आश्रमों और मंदिरों में विधि पूर्वक तुलसी पूजन किया गया। महिलाओं ने शाम को मंडप बनाकर तुलसी जी का शालिग्राम भगवान से विवाह कराया। औराई, सीतामढ़ी, सुभानगर, चौरी, महराजगंज, बाबूसराय समेत कई इलाकों में बृहस्पतिवार को प्रबोधनी एकादशी मनाया गया जबकि ज्ञानपुर, सुरियावां में शुक्रवार को एकादशी मनाया जाएगा। इस दौरान काफी संख्या में लोगों ने ईंख आदि की पूजा की। आचार्य पं. दीनानाथ शुक्ला बताते हैं कि चार माह शयन के बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी को श्रीहरि क्षीरसागर में निंद्रा से जागते हैं। उनके जागने के बाद से नए और वैवाहिक मंगल कार्य शुरू हो जाते हैं। द्वादशी तिथि को तुलसी एवं शालिग्राम का विवाह कार्यक्रम होता है, जो श्रद्धालु इनका विवाह कराते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। बताया कि बृहस्पतिवार शाम पांच बजे से एकादशी शुरू हो रही है, जिससे कुछ लोग आज ही मना रहे हैं।
सीतामढ़ी संवाददाता के अनुसार, देवोत्थानी (प्रबोधिनी) एकादशी पर धार्मिक स्थली सीतामढ़ी में नारायण भक्तो ने पतित पावनी गंगा में डुबकी लगा कर भक्ति भाव पूर्वक मंदिरों में पूजन अर्चन कर दान पुण्य किया। भक्तों ने निराजल ब्रत रख कर गंगा स्नान के पश्चात बिधिवत नारायण भगवान का पूजन कर दान पुण्य किया।