जिले की बहुचर्चित डीघ ब्लॉक सीट पर मनीष मिश्रा का दबदबा इस बार भी कायम रहा। वह शनिवार को डीघ ब्लॉक के चौथी बार ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित हुए हैं। इसके पहले मनीष पांच वर्ष तक ज्ञानपुर के भी ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं। इस क्रम में शनिवार को जैसे ही दोपहर साढ़े तीन बजे जैसे जीत का निर्णय मनीष के पक्ष में आया उनके समर्थक झूम उठे।
दरअसल नब्बे के दशक में जिले में ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्र का पदार्पण हुुआ। इसके बाद वह 1988 से 2000 तक डीघ के ब्लॉक प्रमुख पद पर आसीन रहे। जबकि साल 2000 में विधायक विजय मिश्रा जिला पंचायत अध्यक्ष चुन लिए गए। उसके बाद उनके भतीजे मनीष मिश्रा 2000 से लेकर 2015 तक लगातार तीन बार प्रमुख बनें। हालांकि इसी बीच साल 2015 में डीघ ब्लॉक की सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हो गई तो मनीष ने ज्ञानपुर ब्लॉक से चुनाव लड़कर एक बार फिर जीत का परचम लहराया। 2021 के चुनाव में डीघ सामान्य हुई तो वह पुराने स्थान पर लौट गए। यहां से निर्दल मनोज मिश्र और मनीष मिश्र के बीच कड़ा मुकाबला रहा। भाजपा ने भी यहां प्रत्याशी की घोषणा न करके वाकओवर दे दिया। करीब दो महीने से चल रहे उठापठक पर शनिवार को विराम लग गया। मनीष मिश्र 78 मत पाकर चौथी बार डीघ के ब्लॉक प्रमुख बने। वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी मनोज को 44 वोट मिला।
भाजपा से अधिकृत प्रत्याशी न बनने पर नामांकन न करने वाले राकेश मिश्र ने शनिवार को मतदान भी नहीं किया। उन्होंने ब्लॉक प्रमुख चुनाव के मतदान का बहिष्कार किया।उन्होंने कहा कि पार्टी में सक्रिय कार्यकर्ता की उपेक्षा की गई। कई ब्लॉकों में उपेक्षा की गई। औराई और डीघ में उम्मीदवार न उतारने से निर्दल प्रत्याशियों को वाकओवर दिया गया।