ज्ञानपुर जिला चिकित्सालय में विचाराधीन बंदी की मौत के बाद जुटी भीड़।
जालसाजी समेत कई धाराओं में जिला जेल में बंद एक 80 साल के विचाराधीन बंदी की रविवार को मौत हो गई। मौत की खबर लगते ही जेल प्रशासन में खलबली मच गई। मृतक बंदी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
हरियाणा के भिवानी गांव निवासी हरिज्ञान सिंह (80) पुत्र बाबूलाल को नौ माह पूर्व गोपीगंज पुलिस ने जालसाजी और आईटी एक्ट में गिरफ्तार किया था। 10 अगस्त 2015 को से जेल भेजा गया था। उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 66 आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया था। पिछले कई दिनों से उसकी तबियत खराब चल रही थी, जेल प्रशासन की ओर से उपचार भी कराया जा रहा था। गत दिनों जिला जज, डीएम और एसपी निरीक्षण के दौरान बंदी से मिले थे और उसके परिवार वालों से भी बातचीत कराए थे।
रविवार को अचानक उसकी तबियत खराब हुई। आनन-फानन में उसे जिला अस्पताल ले जाया गया जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। जेल अधीक्षक शशिकांत सिंह ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। विचाराधीन बंदी की मौत की सूचना परिवार वालों को दे दिया गया है। मालूम हो कि 10 माह पूर्व जिला जेल में चौरहटा कांड के एक विचाराधीन बंदी की संदिग्ध मौत हुई थी।