ज्ञानपुर। नगर पालिका क्षेत्र के छोटी चौमुहानी स्थित जमीन पर अब नगर पालिका नहीं बल्कि जिला पंचायत एक करोड़ 70 लाख रुपये खर्च कर कामर्शियल दुकानों का निर्माण कराएगा। पूर्व के दिनों में शासनादेश 1976 और संशोधन 2002 को लेकर दोनों संस्थाओं ने एक-दूसरे के कार्य क्षेत्र में उक्त जमीन होने का दावा किया था, लेकिन दो दशक से जिला पंचायत ने अपना दावा कर जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद के समक्ष मूल दस्तावेज पेश कर मामले को अपने पक्ष में आने का दावा कर दिया है। बताते हैं कि सदर मोहाल-खरहट्टी मोहाल के समीप छोटी चौमुहानी पर उक्त जमीन बने भवन पर ऊपर कन्या विद्यालय तो नीचे दुकानें चलती रहीं। भवन के काफी जर्जर होने के कारण किसी भी तरह की अनहोनी का भय लोगों में लगा रहता था। मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचते ही उसे चार माह पूर्व धराशाई कराते हुए विद्यालय को अन्यत्र संबद्ध कर दिया। इसके उपरांत शुरू हुए मालिकाना हक की लड़ाई ने नगर पालिका गोपीगंज और जिला पंचायत को आमने-सामने लाकर खड़ा भी करने में कसर नहीं रही। चार माह तक धराशायी हुए भवन की जमीन पर कहीं वाहन पार्किंग तो कहीं सब्जी आदि दुकानें सजने लगी। जिला पंचायत ने डीएम के सामने 1976 के दस्तावेज पेश कर दुकानों से होने वाली वसूली को परोक्ष साक्ष्य दिखा दिया। जबकि पालिका प्रशासन 1976 के दस्तावेज को 2002 में शंसोधित होना बताया लेकिन राहत नहीं मिल सकी। हम किसी से कम नहीं की तर्ज पर जिला पंचायत प्रशासन ने मामले को अपने पक्ष में कराकर 1 करोड़ 70 लाख की लागत से बनने वाली दुकानों के लिए पिलर की खुदाई भी शुरु करा दी है। अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत सुभाषचंद्र भारतीय का कहना रहा कि जब दुकानों से वसूली जिला पंचायत करती है तो मालिकाना हक भी उसी का होगा। उधर पालिका प्रशासन ने शासनादेश 2002 का हवाला रखकर दावा किया है कि यदि नगर पालिका, नगर पंचायत, ग्रामसभा आदि संस्थाओं के दायरे में आने वाली जमीनों, दुकानों पर शासन उन्हीं संस्थाओं के अंतर्गत किया है। बावजूद इसके हो रही उपेक्षा हो रही है। वहीं आरोप-प्रत्यारोप से हटकर दुकान आवंटित कराने वाले अभी से जिला पंचायत की खाक भी छानना शुरू कर चुके हैं। जेई अनिल कुमार ने कहा कि निर्माण पूर्ण होने पर ही दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।