ज्ञानपुर। सरकारी अस्पतालों में मरीजों और प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को भोजन और दूध, फल आदि देने की योजना लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। जिला अस्पताल से लेकर पीएचसी और सीएचसी तक मरीजों को समुचित ढंग से भोजन नहीं दिया जा रहा है। जहां कहीं दिया भी जाता है तो निर्धारित मेन्यू को ताख पर रखकर।
जिला अस्पताल में मरीजों को भोजन और दूध देने की व्यवस्था की गई है। मगर पिछले कई महीनों से यहां भर्ती होने वाले मरीजों को न तो भोजन दिया जा रहा है ना ही दूध। यहां तक प्रसव कराने के लिए आने वाली महिलाओं को भी दूध नहीं दिया जा रहा। यहां भर्ती मरीजों को बाजार से खरीदकर संतुलित आहार की व्यवस्था करनी पड़ती है। मंगलवार को अमर उजाला ने इसकी पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। यहां भर्ती मरीजों ने बताया कि उन्हें अस्पताल की तरफ से कभी दूध, फल या भोजन नहीं मिला। 17 अक्तूबर से जिला अस्पताल में भर्ती मरीज सुजीत उपाध्याय ने बताया कि जब से भर्ती हैं, दवा के अलावा अस्पताल से कुछ नहीं मिला। खाना और दूध बाहर से मंगवाते हैं। प्रीति को ऑपरेशन से बच्चा हुआ है। उन्हें दूध और फल तो छोड़िए भोजन तक की व्यवस्था अस्पताल की ओर से नहीं की गई। उनके पति ने बताया कि यहां फल, दूध और भोजन की कोई व्यवस्था नहीं है। खाना बाहर से मंगवाना पड़ता है। इसी तरह अन्य मरीजों को भी दूध और भोजन के नाम पर कुछ नहीं मिला।
दूसरी ओर अस्पताल में मरीज गंदगी और बदबू की समस्या से भी परेशान दिखे। वार्डों में बेड पर लगी बेडशीट की गंदगी दिखाते हुए मरीज बता रहे थे कि यह कई दिनों से नहीं बदली गई। टॉयलेट की बदबू वार्डों तक फैलती रहती है। मरीजों ने बताया कि बिजली कटने के बाद जेनरेटर भी नहीं चलाया जाता। गर्मी में ही रहना पड़ता है।