इसमें कुल 990 मामलों का निस्तारण कर 71 हजार 950 रुपये अर्थदंड वसूली की गई। जबकि 13 लाख 31 हजार 463 रुपये उत्तराधिकार प्रमाण पत्र निर्गत, बैंक लोन के प्री-लिटिगेशन के मामले में दो करोड़ 78 लाख आठ हजार 271 रुपये समझौता राशि तय किया गया।
प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय अनिरुद्ध सिंह मौर्य ने वैवाहिक के दो मामले, सीजेएम सत्यवान सिंह ने आपराधिक के 160 मामले निस्तारित कर अंतिम रिपोर्ट में 19 हजार 70 रुपये अर्थदंड, सिविल जज सीडि. प्रवीण कुमार पांडेय ने दीवानी के चार व अन्य पांच वाद और उत्तराधिकार के सात वाद निस्तारित किया।
एसीजेएम परवेज अख्तर ने आपराधिक के 170 वाद निस्तारित कर 44 हजार नौ सौ दस रुपये अर्थदंड वसूले और अंतिम रिपोर्ट चार निस्तारित किए। सिविल जज जूडि. कमल कांत श्रीवास्तव ने दीवानी के दो वाद, जेएम द्वितीय सुशील कुमार ने आपराधिक के 70, अर्थदंड सात हजार नौ सौ 70 रुपये वसूले, अपर सिविज जज शरद कुमार चौधरी ने दीवानी के एक मामले को निस्तारित किया।
जिले के तीनों एसडीएम ने 164 मामले, तीनों तहसील दार ने 29 मामले निस्तारित किए। निस्तारित मामलों से 1007 लोग व्यक्ति लाभान्वित हुए। उधर, बैक लोन के मामले में गठित लोक अदालत पीठ ने 368 मामले निस्तारित किया।
दो करोड़ 78 लाख आठ हजार दो सौ 71 रुपये समझौता राशि तय की गई। इसमें 67 लाख 97 छह सौ 41 रुपये मौके पर वसूली की गई। अदालत में यूबीआई, एसबीआई, केजीएसबी, बीओबी, इलाहाबाद बैंक, बैंक आफ इंडिया, पीएनबी, यूको और ओरिएंटल बैंक के मामले शामिल रहे।