ज्ञानपुर। जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के दावे धरातल पर दम तोड़ रही है। पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रो पर 50 लाख रुपये से आई डिजिटल एक्स-रे मशीनें धूल फांक रही हैं। पांच से छह महीने पूर्व आई मशीनों को न तो इंस्टॉल कराया गया और न ही व्यवस्थाएं दुरुस्त की गई। जिससे यह मशीनें गोदाम की शोभा बढ़ा रही हैं। इससे सीएचसी पर आने वाले मरीजों को मजबूरन में एक्सरे के लिए निजी दुकानों की ओर रुख करना पड़ता है। जिले में कुल छह सीएचसी है, जिसमें गोपीगंज को छोड़ कर कर हर सीएचसी पर एक्सरे मशीन छह महीने पूर्व ही आ चुकी है। औराई सीएचसी परिसर में बने ट्रॉमा सेंटर के लिए एक पोर्टेबल एक्स-रे मशीन आई है, जो की हड्डी की चीरफाड़ और छोटे ऑपरेशनों के लिए उपयोग की जाती है, हालांकि यह भी गोदाम में रखी गई है। डीघ सीएचसी पर रजिस्ट्रेशन न होने से मशीन इंस्टॉल नहीं की की जा सकी हैं। सुरियावां में मशीन खराब पड़ी हैं, उसका पार्ट ही नहीं मिल रहा है। मरम्मत करने के लिए इंजीनियर को बुलाया जाता है, लेकिन वे भी वापस चले जाते हैं। भानीपुर में एक्सरे मशीन इंस्टॉल तो हैं, लेकिन टेक्निशियन न होने के कारण बंद हैं। वहीं एक्सरे मशीन भदोही सीएचसी के गोदाम की शोभा बढ़ा रही हैं। अधिकारियों की उदासीनता के चलते इसका लाभ आम लोगों को नहीं मिल पा रहा है। औसतन हर सीएचसी पर 20 से 25 मरीज एक्सरे के लिए प्रतिदिन आते हैं, लेकिन उन्हें विवशता में निजी सेंटरों पर जाकर एक्सरे कराना पड़ता है। जहां 250 से 300 रुपये का भुगतान करना पड़ता है।
इनसेट:
संचालकों के तालमेल से अफसर नहीं दे रहे ध्यान
स्वास्थ्य केंद्रो पर सुविधाएं हैं। शासन की तरफ से आधुनिक मशीनों से लेकर अन्य सुविधाएं दी जाती हैं, लेकिन निजी संचालक सीएचसी के अफसरों से तालमेल बना लेते हैं। हर महीने कमीशन तय होने से अधिकारी भी गोदाम में रखी मशीनों को बाहर निकलवाने की जहमत भी नहीं उठाते। विभागीय सूत्रों की माने तो सरकारी मशीनें लगने से निजी संचालकों का धंधा चौपट हो जाएगा। जिसके कारण महीनों से मशीने सिर्फ शोपीस बनी है।
वर्जन:
सीएचसी की डिजिटल एक्सरे मशीनों को इंस्टॉल कराने का निर्देश दिया जा चुका है। सुरियावां में नई मशीन लगाने की तैयारी है। लापरवाही बरतने वाले अधीक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
- डॉ. संतोष कुमार चक, सीएमओ