पुरानी कलेक्ट्री तिराहा पर शहीद शीतल पाल की जयंती मनाते धनगर समाज के लोग।
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ज्ञानपुर। 1857 की आजादी में शहीद शीतल पाल के योगदानों को याद कर धनगर समाज ने बुधवार को पुरानी कलेक्ट्री तिराहा पहुंचकर मूर्ति पर माल्यार्पण करते हुए नमन किया। इसके बाद जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को फल वितरित कर समाज की एकजुटता पर बल दिया।
वक्ताओं ने कहा कि मूलत: शीतल पाल जौनपुर के निवासी थे, जहां पर इनके नाम का आलीशान तालाब देश की आजादी का गवाह भी है। तालाब के बीच लगे विशालकाय पत्थर पर जन्मकुंडली भी अंकित है। शीतल पाल जीविकोपार्जन के लिए भेड़ चराते हुए ज्ञानपुर के पाली तक आते थे और वहीं अपना ठौर ठिकाना बना लिया। भेड़ चराते समय ही इन्होंने अंग्रेज को मौत के घाट उतार दिया और अंग्रेजी हुकूमत ने शीतल पाल को गिरफ्तार कर गोपीगंज में इमली के पेड़ पर फांसी दी। देश की आजादी में शहादत देने वाले वाले इस वीर पुरुष का परिवार उसी समय पाली से पुन: जौनपुर चला गया। ऐसे शहीदों के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए समाज ही नहीं बल्कि हर वर्ग के लोगों को सीख लेनी चाहिए। इस मौके पर हीरालाल पाल, अखिलेश प्रकाश पाल, रविंद्र पाल, कैलाश पाल, त्रिवेणी पाल, रजनीश बघेल, श्याम सागर, गुलाब पाल, रामलाल, राजकुमार, सूबेदार पाल, घनश्याम पाल आदि रहे।