ज्ञानपुर। सोमवार को नवरात्र की सप्तमी को देवी मंदिरों में कालरात्रि का पूजन किया गया। मंदिरों में महिलाएं और युवतियों की संख्या अधिक दिखी। महिलाओं ने मां से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। सुबह से शाम तक मंदिरों में मां के जयकारे लगते रहे। करीब 60 हजार श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में मत्था टेका।
जिले की देवी मंदिरों में सोमवार की सुबह से ही भक्तों की भीड़ देखी गई। मां कालरात्रि के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालु मंदिर में पहुंचे और मां की अराधना की। गोपीगंज के विभिन्न मंदिरों में भक्त सुबह ही स्नान ध्यान के बाद पहुंचे। समय के साथ देवी मंदिरों में भक्तों की कतार लंबी होती गई। कतार में लगे भक्त मां के जयकारे लगाते रहे। सप्तमी तिथि को मां का कालरात्रि स्वरूप में शृंगार किया गया। रंग-बिरंगे पुष्पों से सजे मां के दरबार में श्रद्धालु भक्ति में मगन दिखे।
क्षेत्र के महाल स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर, चौरा माता मंदिर, बंबा देवी, काली माता मंदिर, काली महाल, शीतला माता मंदिर, लालापुर के साथ गंगा तट पर विराजमान मां शीतला धाम डेरवा, शक्ति धाम तिंलगा में भक्तों का सैलाब उमड़ा। भदोही कटरा बाजार स्थित मां प्राचीन शीतला मंदिर, औराई स्थित मां कड़े माता मंदिर, बाबूसराय क्षेत्र के चेरापुर गांव स्थित मां दुर्गा मंदिर के साथ, सुरियावां के बड़ी महारानी के दरबार के साथ ज्ञानपुर के हरिहरनाथ मंदिर स्थित मां काली, मां शीतला के अलावा भुड़की गांव के समीप घोपइला माता मंदिर में पहुंचे भक्तों ने पूजन-अर्चन किया गया। मां का दरबार सुबह से लेकर शाम तक जयकारों से गुंजायमान रहा।
मां शीतला का अलौकिक शृंगार
गोपीगंज। गंगा तट पर स्थित डेरवा गांव में प्राचीन मां शीतला मंदिर में सोमवार को मां का शृंगार किया गया। बघेल परिवार की ओर से कराए गए शृंगार के बाद बड़ी संख्या में भक्त मां का दर्शन करने पहुंचे। सोमवार होने के कारण वहां साप्ताहिक मेला लगा हुआ था। इस गांव में लोग मां के दरबार में हाजिरी लगाने के बाद ही अपनी दिनचर्या शुरू करते हैं। दूरदराज से लोग मनोकामना पूर्ति के मां के दरबार में पहुंचते हैं। मौके पर पुजारी राजीव पंडा, व्यवस्थापक ओम सिंह बघेल, आशीष सिंह, ऋषि बघेल आदि रहे।
महाअष्टमी का व्रत आज, मां महागौरी की होगी पूजा
डुहिया भावसिंहपुर निवासी आचार्य दीनानाथ शुक्ल ने बताया कि नवरात्र के अष्टमी तिथि को मां के आठवें स्वरूप महागौरी की अराधना की जाती है। मां की पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के प्रथम दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु महाअष्टमी का व्रत भी रखते हैं। इस दिन कन्या पूजन भी किया जाता है। महाअष्टमी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु नवमी को व्रत की पूर्णाहुति करेंगे। भक्त सुबह से लेकर शाम 5.22 बजे तक व्रत की पूर्णाहुति करा सकते हैं।